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संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना: उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार की नई क्रांति

संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना: उत्तर प्रदेश में निवेश और रोजगार की नई क्रांति

“कबीर के श्रम, सादगी और आत्मनिर्भरता से प्रेरित होगी योजना, परंपरा और आधुनिकता का संगम बनेगा यूपी”

लखनऊ, 16 सितंबर।
उत्तर प्रदेश सरकार ने वस्त्र एवं परिधान उद्योग को नई ऊँचाई देने के लिए ऐतिहासिक पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि प्रदेश में “संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना” लागू की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य है – निवेश आकर्षित करना, रोजगार सृजन करना और परंपरागत बुनाई कला को आधुनिक औद्योगिक ढांचे से जोड़ना

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि योजना का नाम संत कबीर के नाम पर इसलिए रखा गया है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन दर्शन में श्रम, सादगी और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च महत्व दिया। यही तीन स्तंभ इस महत्वाकांक्षी योजना का आधार बनेंगे।

मुख्य घोषणाएं और तथ्य (Highlights)

  • 👉 659 निवेश प्रस्ताव → 15,431 करोड़ रुपये निवेश

  • 👉 1,01,768 रोजगार अवसर बनने का अनुमान

  • 👉 प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित होगा

  • 👉 CETP (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) अनिवार्य, पर्यावरण संरक्षण की गारंटी

  • 👉 बटन, ज़िपर, पैकेजिंग, लेबलिंग और वेयरहाउस जैसी सहायक इकाइयां भी पार्क का हिस्सा होंगी

  • 👉 2023-24 में यूपी से 3.5 अरब डॉलर का निर्यात – देश के कुल निर्यात में 9.6% हिस्सेदारी

  • 👉 वस्त्र उद्योग से 22 लाख लोग पहले से जुड़े, जीडीपी में 1.5% योगदान

  • 👉 पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने और सस्ती बिजली उपलब्ध कराने का निर्णय

निवेश और रोजगार का रोडमैप

उत्तर प्रदेश के निवेश सारथी पोर्टल पर अब तक 659 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनकी कुल अनुमानित लागत 15,431 करोड़ रुपये है और इसके लिए 1,642 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी।

सरकार का मानना है कि इन निवेश प्रस्तावों से प्रदेश में 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होंगे। यह ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं के लिए बड़ा अवसर होगा।

वैश्विक बाजार में यूपी की स्थिति

  • वर्तमान में वैश्विक वस्त्र एवं परिधान उद्योग 2030 तक 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
  • भारत की वृद्धि दर 8% प्रति वर्ष है, जिससे यह विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में शामिल है।
  • उत्तर प्रदेश पहले ही देश का प्रमुख निर्यातक है, जिसका 3.5 अरब डॉलर का निर्यात 2023-24 में हुआ।
  • पारंपरिक क्लस्टर जैसे वाराणसी, मऊ, भदोही, मिर्जापुर, सीतापुर, बाराबंकी, गोरखपुर और मेरठ पहले से ही राष्ट्रीय परिधान मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

🧵 बुनकरों की चिंता और समाधान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में कहा कि बुनकर मेहनत और परंपरा के प्रतीक हैं। उनके हाथों से बना कपड़ा विश्वस्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।

सरकार की प्राथमिकताएं:

  • सस्ती बिजली उपलब्ध कराना

  • जनप्रतिनिधियों के सहयोग से संवाद कार्यक्रम शुरू करना

  • पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ना ताकि उत्पादन लागत कम हो और आय बढ़े

इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक ढांचा

  • पार्कों तक सड़क, बिजली और जलापूर्ति की सुविधाएं प्राथमिकता पर दी जाएंगी।
  • योजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल या नोडल एजेंसी के माध्यम से लागू किया जाएगा।
  • सहायक इकाइयों जैसे बटन, ज़िपर, लेबल, पैकेजिंग और वेयरहाउस से पूर्ण सप्लाई चेन तैयार होगी।
  • CETP की स्थापना से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जाएगा।

🚀 युवाओं के लिए नया अवसर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि योजना का मुख्य लक्ष्य युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार दिलाना है।

  • टेक्सटाइल सेक्टर में आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।
  • स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उद्योगों से सीधा जोड़ा जाएगा।
  • इससे स्टार्टअप और MSME यूनिट्स को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

विश्लेषण: यूपी का ‘टेक्सटाइल टर्निंग प्वाइंट’

  1. निवेश और रोजगार – बड़े पैमाने पर निवेशक आकर्षित होंगे और लाखों रोजगार बनेंगे।
  2. परंपरा और आधुनिकता – कबीर की विचारधारा को आधार बनाकर हथकरघा और आधुनिक परिधान उद्योग को जोड़ा जाएगा।
  3. सतत विकास – CETP और सौर ऊर्जा आधारित पॉवरलूम से पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह योजना टिकाऊ साबित होगी।
  4. वैश्विक पहचान – यूपी को वैश्विक वस्त्र और परिधान मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी।

संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना केवल एक औद्योगिक पहल नहीं है, बल्कि यह बुनकरों की परंपरा, युवाओं के रोजगार और निवेशकों की अपेक्षाओं का संगम है। यह योजना उत्तर प्रदेश को भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक परिधान उद्योग में निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर दे सकती है।

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