हिंदी दिवस पर बिजनौर में काव्य उत्सव: जब मंच पर गूंजे गीत-गजल और पत्रकार डॉ. सत्येंद्र शर्मा “अंगिरस” हुए सम्मानित

जैन धर्मशाला बना हिंदी का साहित्यिक दरबार
बिजनौर, 14 सितंबर।
हिंदी दिवस के अवसर पर बिजनौर का जैन धर्मशाला सभागार एक अनोखे रंग में रंगा।
संस्कार भारती और सबरंग संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस समारोह में कवियों ने गीतों, दोहों और गजलों से माहौल को हिंदीमय बना दिया।
कार्यक्रम में हिंदी की महिमा का गुणगान हुआ और साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले **वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार डॉ. सत्येंद्र शर्मा “अंगिरस” को सम्मानित किया गया।
समारोह की गौरवमयी शुरुआत
- अध्यक्षता: गिरीश चंद त्यागी
- मुख्य अतिथि: विकास अग्रवाल (जिला उपाध्यक्ष, संस्कार भारती)
- विशिष्ट अतिथि: वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार डॉ. सत्येंद्र शर्मा “अंगिरस”
- संचालन: कवि दीप अंजुम
दीप प्रज्वलन के साथ मां शारदे को नमन कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। ओमप्रकाश परमार ने श्रद्धांजलि अर्पित की और फिर मंच पर हिंदी का स्वर गूंज उठा।
कवियों के गीत-गजलों ने बांधा समां
समारोह में एक से बढ़कर एक काव्य प्रस्तुतियां हुईं, जिनमें श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
- डॉ. अशोक शर्मा: “मां ऐसा वरदान मुझे दो, कंचन सा मैं बन जाऊं…”
- मनोरंजन शर्मा: “हिंदी भारत की छाती है, यह मिश्री की मधुर डली है…”
- राशि अग्रवाल: “हिंदी है हम – हिंदी है हम” गीत गाकर भाषा की ताकत को रेखांकित किया।
- नरेंद्र शिखर: गजल “उठती है हूक सी मेरे सीने में रात दिन…” पर तालियों की गड़गड़ाहट मिली।
- आरिफ गांधी: गजल “मैं वो सोचता था जो तुमको चुभता था…” सुनकर श्रोताओं ने वाहवाही लूटी।
- डॉ. अनिल चौधरी: “जैसे एक पत्थर की मूरत होती है…” पंक्तियां श्रोताओं को छू गईं।
- दीप अंजुम: “गम से फुर्सत नहीं होने वाली…” गजल से माहौल को सजीव कर दिया।
- सुमन चौधरी: “भारत मां के भाल की बिंदी मुझको प्यारी लागे…”
इसके अलावा गुलशन गुप्ता, डॉ. हिमांशु राठी, बी.आर. पाल, नमनदीप गिलहोत्रा, राजीव शर्मा, जितेंद्र जीतू, विकास अग्रवाल, गिरीश त्यागी और हुक्का बिजनौरी ने भी प्रभावी काव्य पाठ किया।
पत्रकार डॉ. सत्येंद्र शर्मा “अंगिरस” का सम्मान
समारोह का विशेष आकर्षण रहा वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार डॉ. सत्येंद्र शर्मा “अंगिरस” का सम्मान।
सबरंग संस्था के संयोजक हुक्का बिजनौरी सहित सभी सदस्यों ने उन्हें माला, श्रीफल, शॉल, प्रतीक चिन्ह और उपहार प्रदान कर सम्मानित किया।
यह सम्मान उनके लंबे समय से साहित्य और पत्रकारिता में किए जा रहे योगदान की स्वीकृति के रूप में देखा गया।
हिंदी दिवस की महत्ता पर हुई चर्चा
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि –
- हिंदी हमारी आन-बान और शान है।
- यह केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है।
- हिंदी दिवस हम सभी को अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व और उत्तरदायित्व का अहसास कराता है।
बिजनौर का यह हिंदी दिवस समारोह साहित्यिक ऊर्जा और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा संगम बनकर सामने आया।
गीत, गजल और दोहों की गूंज के बीच पत्रकारिता और साहित्य की दुनिया के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. सत्येंद्र शर्मा “अंगिरस” का सम्मान इस आयोजन को यादगार बना गया।










