“ग्रीन गोल्ड” पर योगी सरकार की नज़र: मेंथा किसानों को मिलेगा नया सहारा
बाराबंकी–बिजनौर बने मिंट बेल्ट के हॉटस्पॉट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार मेंथा (मिंट) की खेती को नई तकनीक, बाजार और प्रसंस्करण इकाइयों से जोड़ेगी। अमरोहा, बिजनौर और अवध क्षेत्र के हजारों किसान इससे प्रभावित होंगे।
हाइलाइटर (Analytical Highlights)
- मुख्यमंत्री का संदेश: किसानों को आधुनिक तकनीक और प्रसंस्करण सुविधाएँ उपलब्ध कराकर मेंथा की आय बढ़ाने का भरोसा।
- बाराबंकी–बिजनौर केंद्र में: उत्तर प्रदेश देश का 90% से अधिक प्राकृतिक मेंथा तेल उत्पादन करता है, जिसमें इन जिलों की अहम भूमिका।
- बड़ी चुनौती MSP: मेंथा पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) न होने से किसानों की आमदनी अस्थिर।
- सरकारी कदम: प्राकृतिक मेंथा पर GST घटकर 5% हुआ, सिंथेटिक पर 18% — किसानों को राहत की उम्मीद।
- अवसर: नई किस्में, सामुदायिक डिस्टिलेशन यूनिट्स और एफपीओ (FPO) की ताकत से किसान सीधे बेहतर बाजार जोड़ सकते हैं।
उत्तर प्रदेश की हरियाली भरी खेतों में लहराती मेंथा फसल अब सिर्फ “पुदीना” नहीं, बल्कि लाखों किसानों की जीवनरेखा है। बाराबंकी, अमरोहा और बिजनौर के गाँवों से उठती पत्तियों की खुशबू अब अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँच रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालिया भाषण में किसानों को भरोसा दिया कि सरकार उनके “ग्रीन गोल्ड” यानी मेंथा को मजबूत बाजार और वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ेगी। सवाल है — क्या इससे किसानों की आर्थिक हालत बदलेगी?
मेंथा का भूगोल: यूपी ही क्यों?
उत्तर प्रदेश देश का मेंथा हब है। लगभग 88,000 हेक्टेयर में इसकी खेती होती है और करीब 4 लाख किसान इस पर निर्भर हैं। बाराबंकी अकेले 25–30% उत्पादन देता है, जबकि अमरोहा और बिजनौर पश्चिमी यूपी के बड़े केंद्र बन चुके हैं। अवध क्षेत्र के कई जिलों में भी इसका तेजी से विस्तार हुआ है।
चुनौतियाँ
- उत्पादन घटा: इस बार की भीषण गर्मी से उत्पादन लगभग 40% गिरा।
- MSP की कमी: मेंथा पर समर्थन मूल्य नहीं, किसान पूरी तरह खुले बाजार पर निर्भर।
- पुराने डिस्टिलेशन प्लांट: अधिकांश किसान पारंपरिक और जोखिम भरी इकाइयों से तेल निकालते हैं।
- बाजार अस्थिरता: भाव में भारी उतार-चढ़ाव से किसानों की आमदनी प्रभावित।
सरकारी हस्तक्षेप और अवसर
- GST राहत: प्राकृतिक मेंथा पर कर 5% कर दिया गया है, जबकि सिंथेटिक पर 18% — इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
- नई किस्में: CIMAP की ‘किम-क्रांति’ और ‘किम-उन्नति’ जैसी किस्में कम पानी में भी ज्यादा तेल देती हैं।
- FPO और प्रसंस्करण: किसान उत्पादक संगठन और सामुदायिक डिस्टिलेशन यूनिट से छोटे किसानों को बाज़ार तक सीधी पहुँच मिलेगी।
- वैज्ञानिक अभियान: “कृषि वैज्ञानिक खेतों तक” कार्यक्रम से तकनीक किसानों की जमीन तक पहुँचेगी।
बुलेट प्वाइंट्स – त्वरित निष्कर्ष
- यूपी देश का सबसे बड़ा मेंथा उत्पादक राज्य है।
- बाराबंकी, अमरोहा और बिजनौर इसकी खेती के हॉटस्पॉट।
- गर्मी, लागत और MSP की कमी किसानों की बड़ी चुनौती।
- प्राकृतिक मेंथा पर GST कम होने से किसानों को सीधी राहत।
- सरकार वैज्ञानिक तकनीक और प्रसंस्करण से खेती को आगे ले जाने की तैयारी में।
रिपोर्टर की नज़र / नीतिगत सिफारिशें
- सरकार को मेंथा पर MSP लागू करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
- सामुदायिक डिस्टिलेशन इकाइयों को अनुदान पर उपलब्ध कराया जाए।
- एक्सपोर्ट मार्केट तक किसान सीधे जुड़ें, इसके लिए एफपीओ को सशक्त किया जाए।
- जल प्रबंधन योजनाएँ और नई किस्मों को बढ़ावा देकर उत्पादन संकट कम किया जा सकता है।
👉 निचोड़ यही है कि योगी सरकार की नज़र मेंथा किसानों की पीड़ा और संभावना दोनों पर है। यदि घोषणाएँ जमीनी स्तर पर सही ढंग से लागू हों, तो बाराबंकी से लेकर बिजनौर तक “ग्रीन गोल्ड” की खुशबू से प्रदेश की अर्थव्यवस्था महक सकती है।










