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पढ़े ! प्रियंका सौरभ रचित कविता, “जीवन का माली”

जीवन का माली”

भूमिका: लेखक अवनीश त्यागी 

कविता “जीवन का माली” एक प्रेरणादायक रचना है जो जीवन में सही मार्गदर्शन, अनुशासन और शिक्षा के महत्व को दर्शाती है। इस कविता में “माली” को एक प्रतीक रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो जीवन रूपी बगिया की देखभाल करता है, उसे सींचता है और उसकी रक्षा करता है।

कवि ने यह स्पष्ट किया है कि जो व्यक्ति हमें टोकता है, हमारी गलतियों को सुधारता है और सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है, वही सच्चा मार्गदर्शक होता है। यह माली हमारे माता-पिता, गुरु, संरक्षक या जीवन में मार्गदर्शन देने वाले अन्य व्यक्ति हो सकते हैं, जो कठिनाइयों और संघर्षों से हमें उबारते हैं।

कविता में यह संदेश दिया गया है कि अनुशासनहीन और बिना मार्गदर्शन के जीवन दिशाहीन हो जाता है, जैसे बिना माली के कोई वृक्ष समय से पहले मुरझा जाता है। संस्कार और सीखने की प्रक्रिया को जीवन का अभिन्न अंग बताया गया है, क्योंकि इनके बिना मनुष्य उन्नति नहीं कर सकता।

अतः यह कविता हमें उन व्यक्तियों का आदर और सम्मान करने की प्रेरणा देती है, जो हमें सही राह दिखाते हैं और हमारे जीवन को एक सार्थक दिशा प्रदान करते हैं।

जीवन का माली

जो रोकता, जो टोकता है,
वही सत्य का दीप जला है।
जो कटु वचन से राह दिखाए,
सच मानो, सच्चा सखा है।

जिस बगिया का माली जागे,
हरियाली चारों ओर आए।
स्नेह से जो सींचे जड़ को,
उसका यश जग सारा गाए।

जहाँ न कोई अंकुश होता,
मन का पौधा सूख ही जाता।
बिन मर्यादा, बिन सिखवारे,
हर पथिक बस भटक ही जाता।

माली जो कांटे हटाता,
वही फूल की रक्षा करता।
धूप-सितम से लड़कर भी,
छाँव घनी वह सदा ही करता।

जीवन में जो दिशा दिखाए,
सन्मार्गों की ज्योत जलाए।
ऐसे माली को न भूलो,
उसके ऋण में शीश झुकाए।

बिन माली जो वृक्ष पलेगा,
वह झंझा में शीघ्र ढलेगा।
संस्कार की छाँव जरूरी,
बिन इसके सब शून्य लगेगा।

इस जीवन की राह कठिन है,
हर पथ पर संघर्ष घना है।
जो संवार दे बीज-नवेली,
वही माली धन्य बना है।

प्रियंका सौरभ

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