चकबंदी कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, मई 25 तक हर हाल में निपटारा करें: वान्या सिंह

बिजनौर। जिले में वर्षों से अटके चकबंदी कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) श्रीमती वान्या सिंह ने चकबंदी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी अधिकारी की उदासीनता सामने आई तो कड़ी कार्रवाई तय है।
सिस्टम में सुधार या कार्रवाई – दो ही विकल्प
श्रीमती सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया कि अब उनके पास केवल दो ही विकल्प हैं – या तो पूरी पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ चकबंदी कार्यों को अंजाम दें या फिर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि चकबंदी कार्यों की शासन स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
हर गांव को धारा 7 से बाहर निकालना अनिवार्य
बैठक में एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया कि मई 2025 तक जिले के हर गांव को धारा 7 के दायरे से पूरी तरह मुक्त किया जाना चाहिए। इसका मतलब यह है कि चकबंदी प्रक्रिया के प्रारंभिक चरणों को हर हाल में समय से पहले पूरा करना होगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि हर गांव में काम शुरू करने से पहले 1359 फसली से मिलान करना अनिवार्य होगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
वादों का निस्तारण टॉप प्रायोरिटी
चकबंदी से जुड़े मामलों के लंबित रहने पर नाराजगी जताते हुए अपर जिलाधिकारी ने साफ कहा कि वादों का निस्तारण सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को बेवजह कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने के लिए मजबूर न किया जाए, बल्कि मामलों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से जल्द से जल्द निपटाया जाए।
‘अगर ढिलाई बरती तो सीधे जिम्मेदारी तय होगी’
अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए श्रीमती सिंह ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर शिथिलता बरती गई, तो सीधे उस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी और संबंधित व्यक्ति पर तत्काल कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि चकबंदी कार्यों में पारदर्शिता और गति लाने के लिए यह कदम जरूरी है।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
यह महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में शाम 3:30 बजे आयोजित हुई, जिसमें चकबंदी अधिकारी संजय कुमार शर्मा, सीओ, एसीओ, कानूनगो सहित विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। बैठक के दौरान कार्यों की समीक्षा की गई और अगले दो महीनों की कार्ययोजना तय की गई।
विश्लेषण: प्रशासन की चेतावनी से क्या वाकई बदलेगी तस्वीर?
चकबंदी कार्यों में भ्रष्टाचार और देरी कोई नई समस्या नहीं है। वर्षों से अधिकारी लापरवाही और ढीले रवैये के कारण मामलों को लटकाते आए हैं। लेकिन इस बार प्रशासन ने जो सख्त रुख अपनाया है, वह जिले के भू-स्वामियों और किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगा सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या अधिकारी इस चेतावनी को गंभीरता से लेंगे? क्या वास्तव में मई 2025 तक जिले के हर गांव को धारा 7 से मुक्त कर दिया जाएगा? या फिर यह बैठक भी सिर्फ निर्देशों और चेतावनियों तक सीमित रह जाएगी? प्रशासन की सक्रियता सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब जनता को जमीन पर बदलाव दिखेगा।











