महिला अपराधों की रोकथाम पर मुरादाबाद परिक्षेत्र में अभियोजन कार्यशाला आयोजित

बिजनौर। शासन के निर्देशों के अनुपालन में अपर निदेशक अभियोजन, मुरादाबाद परिक्षेत्र, अवधेश पाण्डेय की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य टॉप-10 अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना और महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना था।
अपराधों में कड़ी सजा दिलाने पर जोर
कार्यशाला में अभियोजन अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि अपराधियों को अधिकतम सजा दिलाने के लिए अभियोगों की पैरवी प्रभावी ढंग से की जाए। विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया को सशक्त बनाने पर बल दिया गया। इसमें यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि गवाह पक्षद्रोही न हों, जिससे अभियोगों की सफलता दर बढ़ाई जा सके।
डीएनए परीक्षण अनिवार्यता पर जोर
बैठक में बलात्कार पीड़िता के गर्भवती होने की स्थिति में डीएनए परीक्षण को अनिवार्य रूप से कराने का निर्देश दिया गया। यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में वैज्ञानिक साक्ष्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया, जिससे अपराधियों के दोषी सिद्ध होने की संभावनाएं बढ़ें और पीड़िता को शीघ्र न्याय मिल सके।
अभियोजन अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में अपर निदेशक अभियोजन अवधेश पाण्डेय के साथ-साथ संयुक्त निदेशक अभियोजन संजय कुमार टंडन, जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) वरुण कुमार, ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी विजय कुमार राम व अखिलेश सहित कई वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी एवं विशेष लोक अभियोजक उपस्थित रहे।
महिला अपराधों पर अभियोजन की प्रतिबद्धता
यह कार्यशाला अभियोजन प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। शासन की मंशा के अनुरूप अभियोजन विभाग महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में त्वरित और निष्पक्ष न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहा है। अभियोजन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कानून की शक्ति का पूरा उपयोग कर अपराधियों को दंडित कराने के लिए तत्पर रहें।
न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की दिशा में प्रयास
कार्यशाला में अभियोजन अधिकारियों को इस बात के लिए भी प्रशिक्षित किया गया कि वे गवाहों को पक्षद्रोही बनने से रोकने के लिए आवश्यक रणनीतियों का प्रयोग करें। यह पहल अभियोगों की सफलता दर को बढ़ाने के साथ-साथ न्याय प्रणाली में विश्वास बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।
अभियोजन विभाग की इस कार्यशाला को अपराधों की रोकथाम और दंडात्मक न्याय प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि अपराधियों को कठोरतम सजा दिलाने की प्रक्रिया भी मजबूत होगी।












