Target Tv Live

राज्यकर्मियों के लिए मानव संपदा पोर्टल अनिवार्य, आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय पर जल्द निर्णय संभव

राज्यकर्मियों के लिए मानव संपदा पोर्टल अनिवार्य, आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय पर जल्द निर्णय संभव

लखनऊ: प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 1 अप्रैल से मानव संपदा पोर्टल पर सभी सेवाओं को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन करने का आदेश जारी किया है। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब राज्यकर्मियों को वार्षिक संपत्ति विवरण (एपीआर), वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर), वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर), वेतन आहरण, छुट्टी आवेदन, कार्यमुक्ति और कार्यग्रहण सहित सभी प्रक्रियाएँ पोर्टल के माध्यम से पूरी करनी होंगी।

डिजिटलीकरण से प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही

सरकार पहले ही 17 जनवरी को शासनादेश जारी कर चुकी थी, लेकिन अनुपालन में आ रही ढिलाई को देखते हुए इसे 1 अप्रैल से अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम न केवल सरकारी कार्यप्रणाली को पारदर्शी और दक्ष बनाएगा, बल्कि इससे कर्मचारियों की प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ेगी। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से स्थानांतरण और वेतन भुगतान जैसी प्रक्रियाएँ सुगम होंगी, जिससे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा।

आउटसोर्स कर्मियों के लिए राहत के संकेत

दूसरी ओर, आउटसोर्स कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए भी सरकार सक्रिय हो गई है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्य सचिव से मांग की कि आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय को जल्द ही निश्चित किया जाए। इस पर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने आश्वासन दिया कि प्रस्ताव को शीघ्र ही कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी और महामंत्री अरुणा शुक्ला के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद के समक्ष भी उठाया। परिषद का कहना है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को उचित वेतन और सुविधाएँ देने से उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और सेवा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

सरकार के फैसले के प्रभाव

  • सरकारी कर्मचारियों के लिए: मानव संपदा पोर्टल का अनिवार्य उपयोग प्रक्रियाओं में तेजी और पारदर्शिता लाएगा।
  • आउटसोर्स कर्मियों के लिए: मानदेय तय होने से वेतन विसंगतियाँ दूर होंगी और वेतन भुगतान की अनियमितताओं को रोका जा सकेगा।
  • प्रशासन के लिए: डिजिटल व्यवस्था से कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सीधा नियंत्रण रखा जा सकेगा और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।

प्रदेश सरकार का यह कदम सरकारी कर्मचारियों के कार्यों को सुव्यवस्थित करने और प्रशासन को अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वहीं, आउटसोर्स कर्मियों की स्थिति में सुधार के लिए सरकार का प्रस्ताव उनके लिए राहत भरा साबित हो सकता है। अब यह देखना होगा कि 1 अप्रैल से लागू होने वाली इस व्यवस्था को कर्मचारी कितनी जल्दी अपनाते हैं और सरकार कब तक आउटसोर्स कर्मियों के हित में ठोस कदम उठाती है।

Leave a Comment

यह भी पढ़ें