Target Tv Live

बिजली कर्मचारियों का निजीकरण के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन, टेक्निकल बिड नहीं खुल सकी

बिजली कर्मचारियों का निजीकरण के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन, टेक्निकल बिड नहीं खुल सकी

लखनऊ ।  उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर आज प्रदेशभर में जबरदस्त प्रदर्शन हुए। राजधानी लखनऊ स्थित शक्ति भवन पर हजारों बिजली कर्मचारियों ने घेराव कर निजीकरण प्रक्रिया के खिलाफ जोरदार विरोध जताया। विरोध प्रदर्शन के चलते ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए निर्धारित टेक्निकल बिड को खोला नहीं जा सका।

संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर निजीकरण प्रक्रिया को तत्काल रद्द कराने की अपील की है। समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण के पीछे भारी भ्रष्टाचार की आशंका है, क्योंकि आरएफपी डॉक्यूमेंट से कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का प्रावधान अचानक हटा दिया गया है, जिससे ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

शक्ति भवन पर उग्र प्रदर्शन

आज के प्रदर्शन में संघर्ष समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी राजीव सिंह, जितेंद्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, पी.के. दीक्षित, महेंद्र राय, सुहैल आबिद, राम कृपाल यादव, मायाशंकर तिवारी सहित अन्य कई नेता शामिल रहे। साथ ही राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन और पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन के सैकड़ों इंजीनियरों और अधिकारियों ने भी विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

प्रदेशव्यापी आंदोलन और 96 दिन का संघर्ष

संघर्ष समिति के नेतृत्व में आज वाराणसी, आगरा, कानपुर, मेरठ, गोरखपुर, झांसी, बरेली, अलीगढ़ समेत कई जिलों और परियोजना मुख्यालयों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन हुए। आज का प्रदर्शन निजीकरण विरोधी आंदोलन का 96वां दिन था। संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि जब तक निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह रद्द नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 42 जिलों की परिसंपत्तियों और उनके रेवेन्यू पोटेंशियल का कोई मूल्यांकन नहीं किया गया है, जो सीधे तौर पर इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 131 का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि सीवीसी गाइडलाइन्स के खिलाफ जाकर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का प्रावधान हटाना बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

संघर्ष समिति ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर विश्वास जताते हुए अपील की कि वे बिजली निजीकरण की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाएं और किसी भी संभावित घोटाले की जांच कराएं। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज होगा।

अगली टेक्निकल बिड की तारीख 10 मार्च तय की गई है, लेकिन कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह रद्द नहीं होगी, वे पीछे नहीं हटेंगे।

(रिपोर्ट: विशेष संवाददाता)

Leave a Comment

यह भी पढ़ें