विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2025: संरक्षण के संकल्प के साथ संपन्न हुआ आयोजन

BIJNOR. बिजनौर के अमानगढ़ रेंज स्थित पीली डाम पर विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2025 के अवसर पर एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य “हमारे साझा भविष्य के लिए आर्द्रभूमियों का संरक्षण” विषय पर लोगों को जागरूक करना था। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी, विशेषज्ञ, स्कूली बच्चे और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
आर्द्रभूमियों का महत्व और संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन संरक्षक एवं क्षेत्रीय निदेशक मुरादाबाद वृत्त, रमेश चंद्रा ने आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिकीय और पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि आर्द्रभूमियाँ न केवल जैव विविधता के लिए आवश्यक हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन को संतुलित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रवासी पक्षियों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
प्रभागीय निदेशक (सामाजिक वानिकी) बिजनौर, ज्ञान सिंह ने संकटग्रस्त आर्द्रभूमियों के पुनर्स्थापन (रेस्टोरेशन) पर जोर देते हुए बताया कि जनपद बिजनौर में 236 आर्द्रभूमियाँ हैं, जो जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों की सहभागिता और जागरूकता अभियान
कार्यक्रम का संचालन उप प्रभागीय वनाधिकारी नजीबाबाद, अंशुमान मित्तल ने किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्द्रभूमियों के महत्व और उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। WWF के विशेषज्ञ मिराज अनवर ने बच्चों को आर्द्रभूमियों और उनमें पाए जाने वाले पक्षियों की विशेषताओं से अवगत कराया, जबकि पक्षी विशेषज्ञ बच्ची सिंह बिष्ट ने पक्षियों की संरचनात्मक विशेषताओं (बर्ड मॉरफोलॉजी) और उनके पारिस्थितिकीय महत्व पर विस्तृत जानकारी दी।
स्कूली बच्चों और वन कर्मियों की सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर विभिन्न रेंजों से आए वन अधिकारियों, नवनियुक्त वन दरोगाओं, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने भाग लिया। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कैप वितरित की गईं, जिससे उनमें प्रकृति और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़े। कार्यक्रम के उपरांत बच्चों को पीली डाम वेटलैंड्स का भ्रमण कराया गया और बर्ड वॉचिंग गतिविधि भी आयोजित की गई, जिससे उन्हें व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का समापन और भविष्य की दिशा
कार्यक्रम के अंत में क्षेत्रीय वन अधिकारी अमानगढ़ ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस आयोजन की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर ए. आर. रहमान द्वारा की गई। इस सफल आयोजन ने न केवल आर्द्रभूमियों के महत्व को रेखांकित किया बल्कि इनके संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रयासों की नींव भी रखी।
विश्लेषण: संरक्षण की ओर एक सार्थक कदम
इस कार्यक्रम की सफलता यह दर्शाती है कि वन विभाग, विशेषज्ञ, स्थानीय समुदाय और बच्चों की सहभागिता से आर्द्रभूमियों का संरक्षण संभव है। हालांकि, यह केवल एक शुरुआत है। आर्द्रभूमियों को बचाने के लिए सरकार, स्थानीय प्रशासन और जनता को दीर्घकालिक योजनाओं पर कार्य करना होगा। इसके लिए नीतिगत पहल, वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान आवश्यक हैं।
बिजनौर के इस कार्यक्रम ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि यदि हम अपने साझा भविष्य को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो आर्द्रभूमियों का संरक्षण हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।











