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बिजनौर: जानलेवा हमला और लूट मामले में दरोगा व सिपाहियों को सजा

बिजनौर: जानलेवा हमला और लूट मामले में दरोगा व सिपाहियों को सजा

BIJNOR. बिजनौर में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रकाश चंद शुक्ला ने 1995 में हुए जानलेवा हमले और लूट के मामले में दरोगा शिवराम यादव और दो सिपाहियों ओमवीर भाटी व राजेंद्र सिंह को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास और 34-34 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।

मामला: लूट और जानलेवा हमला

ग्राम शहजादपुर निवासी उदय सैनी ने कोर्ट के माध्यम से थाना मंडावर में शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के अनुसार, 12 नवंबर 1995 को उनके भाई सतपाल ट्रैक्टर-ट्राॅली से गन्ना भुगतान के 1731 रुपये लेकर वापस आए थे। शाम 6 बजे सतपाल कोल्हू के पास घेर में ट्राली से पूले उतार रहे थे।

इसी दौरान थाना मंडावर में तैनात दरोगा शिवराम यादव, सिपाही ओमवीर भाटी, सिपाही राजेंद्र सिंह और सिपाही सतपाल टेंपो में सवार होकर पहुंचे। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने सतपाल को गालियां दीं और राइफल की बट से मारपीट कर घायल कर दिया। उनकी जेब से 1731 रुपये भी निकाल लिए।

घटनास्थल पर विरोध और फायरिंग

राकेश और दयाराम ने सतपाल को बचाने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें भी पीटा। बाद में सतपाल को टेंपो में बैठाकर पुलिसकर्मी चले गए। मोहम्मदपुर देवमल चौराहे पर सतपाल के भाई मूलचंद ने टेंपो रोका, लेकिन इस दौरान सतपाल टेंपो से भाग निकले।

पुलिसकर्मियों ने सतपाल पर फायरिंग की और मूलचंद को मोटरसाइकिल समेत मारपीट करते हुए थाने ले गए। बाद में मूलचंद को अवैध शराब रखने के झूठे आरोप में चालान कर दिया गया।

शिकायत और न्यायालय का आदेश

घटना के बाद सतपाल, दयाराम और राकेश की चोटों का मुआयना जिला अस्पताल में कराया गया। मूलचंद ने जमानत मिलने के बाद पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सीओ की जांच में लूट और हमला सही पाया गया, लेकिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बाद में कोर्ट के आदेश पर दरोगा शिवराम यादव, सिपाही ओमवीर भाटी, सिपाही राजेंद्र सिंह और सिपाही सतपाल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। विचारण के दौरान सिपाही सतपाल की मौत हो गई।

कोर्ट का फैसला

मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने दरोगा शिवराम यादव, सिपाही ओमवीर भाटी और सिपाही राजेंद्र सिंह को दोषी करार देते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास और 34-34 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इस फैसले ने न्याय की प्रक्रिया में देरी के बावजूद पीड़ित परिवार को राहत दी है।

 

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