‘ODOP का ‘सुपर बूस्ट’: बिजनौर की काष्ठ कला ने मचाया ग्लोबल धमाका, 300 करोड़ पार निर्यात—लेकिन क्यों बढ़ रही चिंता?

✍️ संपादन: अवनीश त्यागी | TargetTvLive विशेष रिपोर्ट
बिजनौर, 03 अप्रैल।
उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना ने बिजनौर की सदियों पुरानी काष्ठ कला (वुड हैंडीक्राफ्ट) और ब्रश उद्योग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। कभी सीमित दायरे में सिमटा यह उद्योग आज वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
जिले में आज 500 से अधिक इकाइयां सक्रिय हैं और करीब 20 हजार लोगों को रोजगार मिल रहा है। उद्योग का सालाना टर्नओवर 300 करोड़ रुपये के करीब पहुंच चुका है, जिसमें से लगभग 250 करोड़ रुपये का निर्यात अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में हो रहा है।
ODOP बना गेम चेंजर: लोकल से ग्लोबल तक का सफर
ODOP योजना के तहत बिजनौर की काष्ठ कला को न केवल पहचान मिली, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनाया गया।
👉 मुख्य उपलब्धियां:
- नगीना वुड क्राफ्ट को GI टैग (2023)
- 1500+ कारीगरों को प्रशिक्षण
- 8-10 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित
- अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर में भागीदारी का अवसर
👉 विश्लेषण:
सरकार की “स्किल + सब्सिडी + मार्केट” रणनीति ने इस सेक्टर को नई उड़ान दी है, जिससे कारीगर अब सीधे ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बन रहे हैं।

नगीना-शेरकोट: देश का ‘हैंडिक्राफ्ट और ब्रश हब’
बिजनौर का नगीना क्षेत्र जहां अपनी बारीक काष्ठ नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है, वहीं शेरकोट आज देश के ब्रश उत्पादन का लगभग 50% हिस्सा सप्लाई करता है।
अब ब्रश उद्योग को भी ODOP में शामिल किया गया है, जिससे इस सेक्टर में और तेज विकास की उम्मीद है।
30 करोड़ के CFC: टेक्नोलॉजी से बदलेगी तस्वीर
उद्योग को आधुनिक बनाने के लिए जिले में 3 कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) बनाए जा रहे हैं:
- कुल लागत: 30 करोड़ रुपये
- 90% सरकारी अनुदान
- आधुनिक मशीनें और फिनिशिंग तकनीक
👉 क्या होगा फायदा?
✔ उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ेगी
✔ समय और लागत में कमी
✔ एक्सपोर्ट क्वालिटी बेहतर होगी
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी: गांवों में आर्थिक क्रांति
ODOP योजना का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिख रहा है।
- हजारों महिलाएं घर से जुड़कर काम कर रही हैं
- अप्रत्यक्ष रोजगार तेजी से बढ़ा
- परिवारों की आय में सुधार
👉 कई यूनिट्स में महिलाएं अब उत्पादन का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।
बड़ी चुनौती: चीनी प्रतिस्पर्धा और घटता मुनाफा
जहां एक ओर उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर निर्यातकों के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो रही हैं:
❗ प्रमुख समस्याएं:
- 18% तक मिलने वाला ड्रॉबैक समाप्त
- मुनाफा घटकर 10-12%
- चीन के सस्ते उत्पादों से कड़ी टक्कर
👉 विश्लेषण:
यदि सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं दोबारा लागू नहीं कीं, तो यह बढ़ता उद्योग दबाव में आ सकता है।
LCL शिपमेंट पर सब्सिडी की मांग
छोटे निर्यातकों की सबसे बड़ी समस्या है—
👉 LCL (Less Container Load) पर सब्सिडी नहीं मिलना
- छोटे ऑर्डर होने पर पूरा कंटेनर भरना संभव नहीं
- सरकार सिर्फ FCL पर सब्सिडी देती है
निर्यातकों की मांग:
CBM (वॉल्यूम) के आधार पर LCL शिपमेंट पर भी सब्सिडी दी जाए
👉 विश्लेषण:
यह कदम छोटे उद्यमियों को वैश्विक बाजार में टिकाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
जेवर एयरपोर्ट और एक्सप्रेस-वे: भविष्य की नई उम्मीद
आने वाले वर्षों में बिजनौर को मिलेगा बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट:
- जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट
- गंगा एक्सप्र्रेस-वे
- शामली-गोरखपुर एक्सप्रेस लिंक
👉 इससे:
✔ लॉजिस्टिक लागत घटेगी
✔ निर्यात तेज होगा
✔ विदेशी खरीदारों की पहुंच आसान होगी
ग्राउंड रिपोर्ट: ODOP बना ‘इकोनॉमिक इंजन’
ODOP योजना ने:
- कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाया
- छोटे उद्यमियों को बड़ा प्लेटफॉर्म दिया
- पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाई
लेकिन…
👉 नीतिगत समर्थन के बिना यह ग्रोथ टिकाऊ नहीं रहेगी।
TargetTvLive विश्लेषण (Editorial Insight)
बिजनौर की काष्ठ कला आज देश के सफल MSME मॉडल्स में शामिल हो चुकी है।
ODOP ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही नीति, फंडिंग और बाजार मिले, तो पारंपरिक उद्योग भी “ग्लोबल ब्रांड” बन सकते हैं।
अब जरूरी है:
- निर्यातकों के लिए नई प्रोत्साहन नीति
- छोटे कारोबारियों को लॉजिस्टिक राहत
- चीन से मुकाबले के लिए रणनीतिक समर्थन
👉 अगर यह कदम उठाए गए, तो बिजनौर का यह उद्योग जल्द ही 300 करोड़ से बढ़कर 1000 करोड़ क्लब में शामिल हो सकता है।
#TargetTvLive #AvnishTyagi #ODOP #BijnorNews #NaginaWoodCraft #ExportIndia #MakeInIndia #MSME #Handicraft #UPNews #EconomicGrowth #RuralDevelopment #WomenEmpowerment











