“बिजनौर में ‘लाठीतंत्र’ का आरोप: कांग्रेस का भाजपा पर सीधा हमला, तालिब प्रकरण ने पकड़ा तूल!”
📍बिजनौर | विशेष रिपोर्ट
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर में कथित “तालिब प्रकरण” को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाजपा और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “तानाशाही” और “लाठीतंत्र” करार दिया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती हेनरिता राजीव सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सत्ता पक्ष पर सीधे निशाना साधा है, जिससे जिले का राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस का आरोप है कि बिजनौर में एक विवादित मामले को लेकर सत्ता के प्रभाव में प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। “तालिब प्रकरण” में कथित तौर पर एक पक्ष के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है।
जिला अध्यक्ष हेनरिता राजीव सिंह ने कहा कि यह मामला अब न्याय की सीमा पार कर चुका है और इसमें सत्ता के दबाव का खुला खेल देखा जा सकता है।
पूर्व सांसद की भूमिका पर सवाल
प्रेस विज्ञप्ति में सबसे बड़ा आरोप भाजपा के एक पूर्व सांसद पर लगाया गया है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि:
- आखिर किस अधिकार से पूर्व सांसद विवादित स्थल पर पहुंचे?
- क्या उनका काम शांति स्थापित करना नहीं, बल्कि माहौल बिगाड़ना है?
कांग्रेस का दावा है कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का काम कर रही हैं।
“लोकतंत्र नहीं, लाठीतंत्र” – कांग्रेस
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में लोकतंत्र की जगह “लाठीतंत्र” चल रहा है।
विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि जब जनप्रतिनिधि ही माहौल बिगाड़ने लगें, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे?
प्रशासन पर भी उठे सवाल
कांग्रेस ने प्रशासन को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि:
“सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन जनता अन्याय का हिसाब जरूर मांगती है।”
यह बयान प्रशासनिक निष्पक्षता पर सीधे सवाल खड़े करता है और संकेत देता है कि मामला केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता से भी जुड़ चुका है।
कांग्रेस की तीन बड़ी मांगें
कांग्रेस ने इस पूरे प्रकरण में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
✅ तालिब प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच
✅ खालिद-तालिब को तत्काल न्याय
✅ बेगुनाहों के उत्पीड़न पर तुरंत रोक
राजनीतिक असर और आगे की राह
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह मामला आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। यदि जांच की मांग को लेकर विपक्ष आक्रामक होता है, तो यह मुद्दा सड़क से लेकर सदन तक गूंज सकता है।
विश्लेषण
बिजनौर का यह मामला केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह “सत्ता बनाम न्याय” की बहस का रूप लेता जा रहा है। कांग्रेस जहां इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—
👉 क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी या यह भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाएगा?
निष्कर्ष
बिजनौर में “तालिब प्रकरण” अब सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में प्रशासन और सरकार की भूमिका इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।
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