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“15 बार गुहार, फिर भी नहीं सुनवाई!” मुरादाबाद के सफाई कर्मियों का फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

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 15 बार गुहार बेअसर! मुरादाबाद मंडल में फूटा सफाई कर्मचारियों का आक्रोश—वेतन-एरियर, ट्रांसफर और भ्रष्टाचार पर बड़ा अल्टीमेटम

रिपोर्ट: TargetTvLive डेस्क | मुरादाबाद

मुरादाबाद मंडल में ग्रामीण सफाई कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश पंचायती राज ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ ने मंडलायुक्त को भेजे एक तीखे और विस्तृत ज्ञापन में 14 गंभीर मुद्दों को उठाते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि एक महीने के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि: 15 बार शिकायत, फिर भी समाधान शून्य

संघ का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर पहले भी 10 से 15 बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

यह स्थिति अब कर्मचारियों के लिए केवल असुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक और मानसिक संकट बन चुकी है।

मुख्य मुद्दे: वेतन से लेकर सिस्टम तक सब पर सवाल

1. वेतन और एरियर का बड़ा संकट

  • 10 से 16 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को एरियर नहीं मिला
  • कई कर्मचारियों का महीनों से वेतन रुका हुआ
  • मांग: एक माह के भीतर भुगतान

2. सर्विस बुक और रिकॉर्ड में गड़बड़ी

  • कई कर्मचारियों की सर्विस बुक अधूरी
  • एपीएस (APS) बुक तक नहीं बनी
  • इससे प्रमोशन और अन्य लाभ अटके

3. महिला कर्मचारियों की बड़ी समस्या

  • 5 किमी से अधिक दूरी पर तैनाती
  • मांग: 5 किमी के भीतर स्थानांतरण

4. मृतक आश्रितों की अनदेखी

  • ग्रेच्युटी, फंड, पेंशन में देरी
  • परिवार आर्थिक संकट में

5. उपकरणों का अभाव

  • ठेली, रिक्शा और सफाई उपकरण उपलब्ध नहीं
  • मरम्मत तक नहीं कराई जा रही

भ्रष्टाचार और कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप

संघ ने कुछ कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाते हुए उन्हें कार्यालय से हटाकर ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात करने की मांग की है।

साथ ही बिना लिखित आदेश कर्मचारियों की ड्यूटी इधर-उधर लगाने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है।

बजट और प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि 31 मार्च 2026 से पहले कर्मचारियों के सभी रुके हुए वेतन और एरियर का भुगतान कर दिया जाए, अन्यथा बजट वापस न किया जाए।

यह सीधे तौर पर वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

विश्लेषण: सिस्टम क्यों हो रहा फेल?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला केवल कर्मचारियों की नाराजगी नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कमजोरियों का संकेत है:

  • फाइलों का वर्षों तक लंबित रहना
  • विभागीय समन्वय की कमी
  • जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग का अभाव
  • कर्मचारियों के हितों की अनदेखी

यदि यही स्थिति बनी रही, तो इसका असर ग्रामीण स्वच्छता व्यवस्था पर साफ दिखाई देगा।

आंदोलन की आहट: क्या ठप हो जाएगी सफाई व्यवस्था?

संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर एक माह में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

ऐसे में मुरादाबाद मंडल के जिलों—बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल और रामपुर—में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

प्रशासन का रुख क्या?

अब तक प्रशासन की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द बैठक संभव है।

निष्कर्ष: सिर्फ कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, सिस्टम की परीक्षा

यह मामला केवल वेतन या ट्रांसफर का नहीं, बल्कि पूरे ग्रामीण स्वच्छता तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा है।
यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।

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