बिजनौर में NOC घोटाला! पेट्रोल पंप के नाम पर खेल, 2 लेखपाल सस्पेंड—बड़ा खुलासा
रिपोर्ट अवनीश त्यागी
बिजनौर | 18 मार्च 2026। डिजीटल न्यूज डेस्क
बिजनौर में पेट्रोल पंप स्थापित करने के नाम पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने में बड़ा खेल सामने आया है। तहसील प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ है कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि श्रेणी के विपरीत भ्रामक रिपोर्ट लगाकर NOC जारी करा दिया गया, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए दो लेखपालों को तत्काल निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
तहसीलदार सदर बिजनौर के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के मुरादाबाद मंडल कार्यालय द्वारा ग्राम खेड़की हेमराज (तहसील व जिला बिजनौर) में पेट्रोल पंप स्थापित करने के लिए NOC की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
इस दौरान खसरा संख्या 8/1, 8/70/1 और 8/87/2 की भूमि, जो कि श्रेणी-1(ख) में दर्ज है, पर रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की अनुमति के लिए प्रस्ताव भेजा गया।
👉 गंभीर बात:
राजस्व टीम—
- सर्वे लेखपाल अनिल कुमार
- राजस्व लेखपाल मोहम्मद अरशद
- राजस्व निरीक्षक कुंभकरण सिंह
द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को भ्रामक पाया गया।
कानूनी पेंच और प्रशासन की सख्ती
जांच में सामने आया कि संबंधित भूमि की श्रेणी के आधार पर वहां पेट्रोल पंप स्थापित करना नियमों के विरुद्ध था।
📌 जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) के 23 फरवरी 2026 के पत्र के आधार पर:
- जारी किया गया NOC अवैध माना गया
- इसे तत्काल निरस्त करने की संस्तुति जिलाधिकारी को भेज दी गई
कड़ी कार्रवाई: 2 निलंबित, एक पर लटकी तलवार
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए:
✅ सर्वे लेखपाल अनिल कुमार – निलंबित
✅ राजस्व लेखपाल मोहम्मद अरशद – निलंबित
⚠️ राजस्व निरीक्षक कुंभकरण सिंह – कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई
क्या संकेत देता है यह मामला? (विश्लेषण)
1️⃣ राजस्व सिस्टम में पारदर्शिता पर सवाल
इस घटना ने साफ कर दिया कि जमीन की श्रेणी बदलने या गलत रिपोर्ट लगाने के जरिए बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दिलाने की कोशिशें हो रही हैं।
2️⃣ कॉर्पोरेट-प्रशासनिक समन्वय की जांच जरूरी
हालांकि कंपनी की भूमिका स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या सत्यापन प्रक्रिया पर्याप्त मजबूत थी?
3️⃣ DM स्तर पर निगरानी का असर
मामला सामने आते ही जिलाधिकारी स्तर पर हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई यह दिखाती है कि प्रशासन अब ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपना रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
- NOC पूरी तरह रद्द होने की संभावना
- विभागीय जांच का विस्तार
- अन्य संदिग्ध NOC मामलों की भी समीक्षा
- संबंधित अधिकारियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई
निष्कर्ष
बिजनौर का यह मामला सिर्फ एक NOC रद्द होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे राजस्व तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती न हो, तो बड़े स्तर पर जमीन से जुड़े घोटालों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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