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15 दिन का अल्टीमेटम: बरूकी में भाकियू का धरना टला

15 दिन का अल्टीमेटम: बरूकी में भाकियू का धरना टला, अब ‘पुलिया वादा’ पर टिकी प्रशासन की साख

📍 बिजनौर | 18 मार्च 2026

बरूकी में सर्विस रोड पर पुलिया निर्माण को लेकर चल रहा भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का धरना फिलहाल 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। लेकिन यह स्थगन सिर्फ एक विराम है—असल परीक्षा अब प्रशासन और नेशनल हाईवे निर्माण कंपनी के लिए शुरू हो चुकी है।

एक घंटे चली त्रिपक्षीय वार्ता के बाद अधिकारियों ने पुलिया निर्माण जल्द शुरू कराने का आश्वासन दिया, जिस पर भरोसा जताते हुए किसानों ने आंदोलन को अस्थायी रूप से रोक दिया। हालांकि भाकियू ने साफ चेतावनी दी है कि तय समयसीमा में काम शुरू न होने पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

बरूकी क्षेत्र में सर्विस रोड पर पुलिया न होने से स्थानीय लोगों और किसानों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात और जलभराव के दौरान हालात और गंभीर हो जाते हैं। इसी मुद्दे को लेकर भाकियू ने धरना शुरू किया था, जो अब प्रशासनिक आश्वासन के बाद टल गया है।

वार्ता में क्या हुआ तय?

  • सुबह 7 बजे धरना स्थल पर पुलिस, हाईवे कंपनी और भाकियू के बीच बैठक
  • करीब एक घंटे तक चली बातचीत
  • नेशनल हाईवे निर्माण कंपनी ने पुलिया निर्माण जल्द शुरू करने का दिया आश्वासन
  • भाकियू ने 15 दिन का समय देकर धरना स्थगित किया

भाकियू का अल्टीमेटम: ‘काम नहीं, तो बड़ा आंदोलन’

भाकियू जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान के नेतृत्व में किसानों ने स्पष्ट किया कि यह अंतिम मौका है।
👉 यदि 15 दिन में निर्माण शुरू नहीं हुआ:

  • फिर से धरना शुरू होगा
  • आंदोलन को बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा
  • प्रशासन और कंपनी के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज होगा

विश्लेषण: क्यों अहम है यह 15 दिन?

यह मामला सिर्फ एक पुलिया निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और ग्रामीण समस्याओं के समाधान की गति पर भी सवाल खड़ा करता है।

👉 प्रमुख बिंदु:

  • ✔️ विश्वास बनाम वादाखिलाफी: पहले भी कई परियोजनाएं आश्वासन में अटकी रही हैं
  • ✔️ किसानों की बढ़ती एकजुटता: भाकियू का रुख अब और आक्रामक हो सकता है
  • ✔️ हाईवे परियोजनाओं की धीमी रफ्तार: स्थानीय स्तर पर समस्याएं अनसुलझी
  • ✔️ प्रशासन की साख दांव पर: 15 दिन में परिणाम नहीं आया तो असंतोष बढ़ेगा

कौन-कौन रहे मौजूद?

वार्ता में पुलिस क्षेत्राधिकारी संग्राम सिंह, नेशनल हाईवे कंपनी के अधिशासी अभियंता आशीष शर्मा, भाकियू जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष धर्मवीर सिंह धनखड़ समेत कई पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे।

ग्राउंड रियलिटी: समस्या सिर्फ पुलिया नहीं

स्थानीय लोगों के अनुसार यह मुद्दा क्षेत्र की बड़ी समस्याओं का हिस्सा है—

  • खराब सर्विस रोड
  • जलभराव
  • आवागमन में दिक्कत
  • दुर्घटनाओं का खतरा

‘डेडलाइन’ से तय होगा अगला संघर्ष

बरूकी का यह मामला अब एक ‘टेस्ट केस’ बन चुका है—क्या प्रशासन और कंपनी 15 दिन में भरोसा कायम रख पाएंगे या फिर यह शांत धरना एक बड़े आंदोलन में बदल जाएगा?

आने वाले दो हफ्ते न सिर्फ पुलिया निर्माण, बल्कि प्रशासनिक प्रतिबद्धता की असली परीक्षा होंगे।

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