बिजनौर जिला अस्पतालों का व्यापक निरीक्षण, डीएम जसजीत कौर का सख्त संदेश
“स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं”
हाइलाइट्स
- ब्लड बैंक में अव्यवस्थाओं पर सुधार के निर्देश
- डायलिसिस सेंटर में सफाई व डीजल स्टॉक रखने का आदेश
- 66 लाख की लागत से ब्लड कलेक्शन सेंटर एक माह में तैयार होगा
- जच्चा-बच्चा वार्ड में एलईडी टीवी लगाने का निर्देश
- अल्ट्रासाउंड केंद्र बंद पाए जाने पर डॉक्टर से जवाब-तलब
- पुरुष मेडिकल कॉलेज भवन जल्द स्वास्थ्य विभाग को सौंपने का आदेश
बिजनौर, 16 सितंबर।
जनपद में स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी जसजीत कौर ने मंगलवार को जिला महिला अस्पताल, ब्लड बैंक, डायलिसिस सेंटर, जच्चा-बच्चा वार्ड और पुरुष मेडिकल कॉलेज भवन का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह, सीएमएस पुरुष अस्पताल डॉ. ए.के. त्यागी, महिला अस्पताल की डॉ. प्रभा रानी, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज और कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान डीएम ने साफ कहा कि “मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज और सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है, किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
🔹 ब्लड बैंक पर जिलाधिकारी की पैनी नजर
जिलाधिकारी ने सबसे पहले ब्लड बैंक का जायजा लिया।
- सीरोलॉजी कक्ष, रक्त संग्रह कक्ष, ब्लड कंपोनेंट यूनिट और आरओ प्लांट का निरीक्षण किया।
- ब्लड स्टॉक रजिस्टर की जांच की, जहां अधिकारियों ने बताया कि रक्त अधिकतम 40 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
- निरीक्षण के दौरान फर्श टूटा हुआ और आरओ कक्ष का दरवाजा जर्जर पाया गया। डीएम ने तुरंत इन्हें सही कराने के निर्देश दिए।
- उन्होंने विशेष रूप से आदेश दिया कि ब्लड बैंक के बाहर थैलेसीमिया रोगियों को निशुल्क रक्त उपलब्धता की जानकारी वॉल पेंटिंग और फ्लेक्स पर बड़े अक्षरों में अंकित की जाए, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को स्पष्ट जानकारी मिल सके।
🔹 डायलिसिस सेंटर में अव्यवस्था, डीएम ने दिखाई सख्ती
इसके बाद डीएम ने डायलिसिस सेंटर का निरीक्षण किया।
- उन्होंने पाया कि सफाई व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं है, जिस पर नाराजगी जाहिर की।
- बिजली आपूर्ति सुचारू रखने के लिए उन्होंने निर्देश दिए कि हर समय पर्याप्त डीजल का स्टॉक रखा जाए, ताकि आपात स्थिति में डीजल जनरेटर का इस्तेमाल किया जा सके।
- सेंटर में उस समय 8 मरीज डायलिसिस करा रहे थे। डीएम ने मरीजों से सीधे बातचीत की। सभी मरीजों ने इलाज और अन्य सुविधाओं पर संतोष व्यक्त किया।
🔹 66 लाख की लागत से बन रहा ब्लड कलेक्शन सेंटर
जिलाधिकारी ने महिला अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बन रहे ब्लड कलेक्शन सेंटर का भी निरीक्षण किया।
- कार्यदायी संस्था के मंडलीय अभियंता ने जानकारी दी कि यह केंद्र 66 लाख 19 हजार रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है।
- इसमें सभी प्रकार की ब्लड टेस्टिंग और जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
- डीएम ने निर्देश दिया कि एक माह के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर अस्पताल को हैंडओवर किया जाए, ताकि मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
🔹 जच्चा-बच्चा वार्ड का निरीक्षण: सुविधाओं से संतुष्ट महिलाएं
निरीक्षण के दौरान डीएम ने जच्चा-बच्चा वार्ड का भी दौरा किया।
- यहां उन्होंने महिलाओं और उनके नवजात शिशुओं से बातचीत की और पूछा कि क्या उन्हें भोजन, दवाइयां और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं।
- महिलाओं ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सभी सेवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
- जिलाधिकारी ने आदेश दिया कि वार्ड में एलईडी टीवी लगाया जाए ताकि महिलाओं और बच्चों का मनोरंजन भी हो सके।
🔹 अल्ट्रासाउंड केंद्र बंद, जिम्मेदार डॉक्टर पर कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान एक महिला ने शिकायत की कि महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड केंद्र कई दिनों से बंद है।
- डीएम ने तुरंत केंद्र का निरीक्षण किया और पाया कि वास्तव में यह बंद है।
- जिम्मेदार डॉक्टर ज्योति बालियान 13 सितंबर से लगातार अनुपस्थित थीं और कोई अवकाश नहीं लिया था।
- डीएम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए डॉक्टर से जवाब-तलब करने के आदेश दिए।
- साथ ही मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को निर्देशित किया कि अल्ट्रासाउंड समेत सभी चिकित्सा सुविधाएं मानक के अनुरूप चालू रहें।
पुरुष मेडिकल कॉलेज भवन पर भी सख्त निर्देश
निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने पुरुष मेडिकल कॉलेज के नए भवन का मुआयना किया।
- उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि ग्राउंड फ्लोर पर बने किचन को तुरंत चालू किया जाए ताकि मरीजों को समय से भोजन मिल सके।
- कार्यदायी संस्था को आदेश दिया कि भवन जल्द से जल्द स्वास्थ्य विभाग को सौंपा जाए और किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही न हो।
जिलाधिकारी का स्पष्ट संदेश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कहा:
“जनता की स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों को मरीजों को बेहतर इलाज और सुविधाएं देने की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी होगी।”












