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बिजली कर्मचारियों का निजीकरण के खिलाफ विरोध तेज, महाकुंभ में बाधा न डालने का आश्वासन

बिजली कर्मचारियों का निजीकरण के खिलाफ विरोध तेज, महाकुंभ में बाधा न डालने का आश्वासन

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों के संगठन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने बिजली वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिजली कर्मियों ने आज मोमबत्ती जुलूस निकालकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी नाराजगी व्यक्त की। समिति ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि वह अनावश्यक औद्योगिक अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहा है।

निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

संघर्ष समिति का कहना है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का निर्णय कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है। आज आयोजित विरोध सभाओं में राजधानी लखनऊ समेत वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर और अन्य जिलों के बिजली कर्मियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। विरोध सभा के बाद मोमबत्ती जुलूस निकाले गए, जिनके जरिए कर्मचारियों ने अपने रोष का प्रदर्शन किया।

महाकुंभ के प्रति विशेष प्रतिबद्धता

संघर्ष समिति ने यह स्पष्ट किया है कि महाकुंभ जैसे महत्वपूर्ण आयोजन को बाधित करना उनका उद्देश्य नहीं है। मौनी अमावस्या स्नान के दृष्टिगत प्रयागराज में बिजली कर्मियों ने 30 जनवरी तक किसी भी प्रकार के आंदोलन से दूर रहने का निर्णय लिया है। समिति ने आश्वासन दिया है कि महाकुंभ के दौरान बिजली व्यवस्था सुचारू और श्रेष्ठतम बनाई जाएगी।

संघर्ष समिति ने इसे एक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व का आयोजन बताते हुए कहा कि बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है।

प्रबंधन पर दमनकारी रवैये का आरोप

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पावर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति का कहना है कि प्रबंधन ने विरोध सभाओं और जुलूस में भाग लेने वाले कर्मचारियों की वीडियोग्राफी करने और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है। समिति ने इसे “अलोकतांत्रिक” और “तानाशाहीपूर्ण” कदम करार दिया।

समिति का कहना है कि बिजली कर्मी कार्यालय समय के बाद या भोजनावकाश के दौरान शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे हैं। ऐसे में इस तरह की कार्यवाही उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

आंदोलन की आगामी योजनाएं

संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि 28 जनवरी को भी राज्यभर में मोमबत्ती जुलूस निकाले जाएंगे। हालांकि, प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ के महत्व को देखते हुए वहां 30 जनवरी तक किसी भी प्रकार का आंदोलन नहीं होगा।

विशेष स्थानों पर बड़े प्रदर्शन

आज लखनऊ के शक्तिभवन मुख्यालय, वाराणसी, आगरा, कानपुर, मेरठ, गोरखपुर समेत विभिन्न परियोजना मुख्यालयों पर विरोध सभाएं हुईं। इनमें बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और अभियंताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

संघर्ष और समाधान की उम्मीद

संघर्ष समिति ने पावर कारपोरेशन प्रबंधन से अपील की है कि वह औद्योगिक शांति बनाए रखने के लिए दमनकारी नीतियों को छोड़कर कर्मचारियों के मुद्दों पर सकारात्मक संवाद स्थापित करे। निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों का यह आंदोलन राज्य में बिजली व्यवस्था और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़ा संदेश है।

आगामी दिनों में इन विरोध प्रदर्शनों का स्वरूप और असर कैसा रहेगा, यह देखने योग्य होगा। वहीं, सरकार और प्रबंधन की ओर से इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाएगा, यह भी महत्वपूर्ण है।

 

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