“राम से रामत्व तक”: वंचित बच्चों की प्रतिभा से गूंजा मंच, वनवासी रक्षा परिवार फाउंडेशन का श्रीराम जन्मोत्सव बना सांस्कृतिक आंदोलन |
TargetTvLive Exclusive
✍️ ओमप्रकाश चौहान, वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार |TargetTvLive
TargetTvLive ग्राउंड रिपोर्ट
ग्रामीण भारत में संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक चेतना का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब वनवासी रक्षा परिवार फाउंडेशन द्वारा बिरौंडी और साकीपुर में श्रीराम जन्मोत्सव को भव्य और प्रेरणादायक रूप में मनाया गया।
TargetTvLive की इस ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण और सांस्कृतिक जागरण का अभियान बन गया।
दो केंद्र, एक उद्देश्य: शिक्षा के साथ संस्कार
फाउंडेशन द्वारा संचालित
- विजय सिंह पथिक प्रतिभा विकास केंद्र, बिरौंडी
- स्वामी विवेकानंद प्रतिभा विकास केंद्र, साकीपुर
में आयोजित कार्यक्रमों ने यह साबित किया कि ग्रामीण और वंचित वर्ग के बच्चों में अपार प्रतिभा छिपी है—बस उन्हें मंच और मार्गदर्शन की जरूरत है।
📍 जेएस आदर्श विद्यालय, बिरौंडी में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में बच्चों ने रामायण आधारित नृत्य, गीत और नाट्य प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
परंपरा के साथ शुरुआत: दीप, पुष्प और श्रद्धा
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता और प्रभु श्रीराम के चित्र पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
इस दौरान प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
प्रिंसिपल रकम सिंह, संतराम मावी, सतीश मावी, ज्ञानचंद, जगदीश प्रधान, सतपाल मावी, ओमवीर मावी, राजेश बिहारी, जगत मावी।
विचारों का मंच: परंपरा बनाम आधुनिकता
प्रो. विवेक कुमार ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति की गहराई को रेखांकित करते हुए कहा:
“हमारा नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, लेकिन आज पश्चिमी अंधानुकरण के कारण अंग्रेजी कैलेंडर हावी हो रहा है।”
👉 यह बयान सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक ढांचे और सांस्कृतिक पहचान पर गहरी चिंता को दर्शाता है।
‘राम से रामत्व’—जीवन का मार्गदर्शन
राजेश बिहारी ने “राम से रामत्व” विषय पर बोलते हुए स्पष्ट किया कि:
- भगवान श्रीराम केवल पूजा के विषय नहीं हैं
- बल्कि उनका चरित्र जीवन जीने की आदर्श प्रणाली है
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राम के आदर्शों—सत्य, त्याग और मर्यादा—को अपने जीवन में अपनाएं।
सेवा और समर्पण का संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सतीश मावी ने समाज में परोपकार और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने की अपील की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में
- आचार्या सविता चौधरी
- भारती भाटी
- ब्रजेश कुमार
का विशेष योगदान रहा।
TargetTvLive विश्लेषण: क्यों खास है यह आयोजन?
1. सांस्कृतिक पुनर्जागरण की मजबूत पहल
ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के आयोजन भारतीय परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।
2. वंचित वर्ग को मिला मंच
ऐसे कार्यक्रम सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को बढ़ावा देते हैं और बच्चों में आत्मविश्वास जगाते हैं।
3. पश्चिमी प्रभाव पर विमर्श
कार्यक्रम में उठे मुद्दे यह संकेत देते हैं कि समाज में अपनी जड़ों की ओर लौटने की एक नई चेतना विकसित हो रही है।
निष्कर्ष: उत्सव से आगे बढ़कर बना संदेश
TargetTvLive की इस रिपोर्ट के अनुसार, यह आयोजन केवल श्रीराम जन्मोत्सव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में उभरा, जिसने शिक्षा, संस्कार और सामाजिक समरसता का मजबूत संदेश दिया।
👉 यदि ऐसे प्रयास निरंतर होते रहे, तो ग्रामीण भारत की नई पीढ़ी न केवल शिक्षित, बल्कि संस्कारित और जागरूक नागरिक बन सकती है।
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