“बिजनौर बार चुनाव में ‘बैलेट लूट’ का आरोप! कोर्ट के आदेश ठुकराकर कराई गई वोटिंग, UP Bar Council सख्त”
गुंडागर्दी से चुनाव? कई प्रत्याशियों ने किया बहिष्कार, अब बड़े एक्शन की तैयारी
विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTVLive
📍 बिजनौर | 3 अप्रैल 2026
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन एंड लाइब्रेरी, बिजनौर के चुनाव 2026-27 को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ है, जिसने पूरे कानूनी जगत में हलचल मचा दी है। गुंडागर्दी, दबाव और बैलेट पेपर कब्जाने जैसे गंभीर आरोपों के बीच अब बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सख्त रुख अपनाते हुए नोटिस जारी कर दिया है।
सुबह 7:55 बजे शुरू हुआ विवाद, चुनाव प्रक्रिया पर कब्जे का आरोप
सूत्रों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद के निर्देशों के तहत एल्डर्स कमेटी द्वारा कराई जा रही थी।
लेकिन 31 मार्च की सुबह करीब 7:55 बजे हालात अचानक बदल गए—
👉 अध्यक्ष पद के प्रत्याशी राजेंद्र कुमार समर्थकों के साथ बार हॉल में जबरन घुसे
👉 “10 लोग अंदर रहेंगे” कहकर दबाव बनाया
👉 मना करने पर एल्डर्स कमेटी को कथित रूप से धमकाया गया
👉 इसके बाद बैलेट पेपर जबरन कब्जे में लेने का आरोप
स्थिति बेकाबू होने पर एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन ठाकुर चंद्रवीर सिंह गहलोत ने चुनाव को तत्काल स्थगित कर दिया।
बार काउंसिल ने चुनाव को बताया अवैध, फिर भी कराई गई वोटिंग!
चौंकाने वाली बात यह रही कि—
➡️ बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने इस चुनाव को पहले ही अवैध घोषित कर दिया था
➡️ इसके बावजूद आरोप है कि चुनाव जबरन कराया गया
➡️ राजेंद्र सिंह टिकट को कथित रूप से अवैध चुनाव अधिकारी बनाया गया
यह पूरा घटनाक्रम न्यायिक आदेशों की खुली अवहेलना माना जा रहा है।
प्रत्याशियों का फूटा गुस्सा, चुनाव का किया बहिष्कार
इस विवादित चुनाव से नाराज कई उम्मीदवारों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव से किनारा कर लिया—
- शेर सिंह
- इसरार अहमद
- गुलिस्ताव
- कोमल सिंह
- तेज सिंह
- प्रीति चौहान
- नितिन कुमार
- विकास नारायण यादव
इन सभी ने सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स में खुलकर विरोध दर्ज कराया।
Bar Council का बड़ा एक्शन—तीन प्रमुख लोगों को नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए बार काउंसिल ने—
🔹 नरेन्द्र सिंह (एल्डर्स कमेटी सदस्य)
🔹 राजेंद्र सिंह टिकट (चुनाव अधिकारी)
🔹 राजेंद्र कुमार (कथित अध्यक्ष)
को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है।
⚠️ चेतावनी भी दी गई है कि जवाब संतोषजनक न होने पर
👉 अधिवक्ता अधिनियम की धारा 35 के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

क्यों गंभीर है यह मामला?
यह सिर्फ एक चुनाव विवाद नहीं, बल्कि—
✔️ न्यायालय के आदेशों की अवहेलना
✔️ लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर दबाव
✔️ अधिवक्ताओं के अधिकारों का हनन
जैसे गंभीर सवाल खड़े करता है।
Target TV Live विश्लेषण
बिजनौर बार चुनाव विवाद अब सिस्टम बनाम सत्ता की लड़ाई जैसा रूप लेता दिख रहा है।
अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला प्रदेशभर में बार चुनावों की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।
क्या हो सकता है आगे?
👉 संबंधित लोगों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई
👉 चुनाव प्रक्रिया की दोबारा जांच
👉 चुनाव निरस्त कर पुनः मतदान
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