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“न्याय या बड़ा आंदोलन?” दिव्यांशु केस पर देहरादून में निर्णायक दिन, टिकैत के ऐलान से मचेगी हलचल

“न्याय या बड़ा आंदोलन?” दिव्यांशु केस पर देहरादून में निर्णायक दिन, टिकैत के ऐलान से मचेगी हलचल

✍️ अवनीश त्यागी | TargetTvLive
📍 बिजनौर/देहरादून | 3 अप्रैल 2026

दिव्यांशु हत्याकांड अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रहा, बल्कि यह न्याय और व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुका है। आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी न होने से नाराज भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। इसी कड़ी में शुक्रवार को बिजनौर से सैकड़ों किसानों का जत्था देहरादून में आयोजित महापंचायत में शामिल होने के लिए रवाना हुआ।

क्या है पूरा मामला?

दिव्यांशु हत्याकांड में पुलिस की धीमी कार्रवाई को लेकर किसानों में गहरा रोष है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर आरोपियों को बचा रहा है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पा रहा।

बिजनौर से ‘किसान शक्ति’ का बड़ा प्रदर्शन

जिला अध्यक्ष सुनील प्रधान के नेतृत्व में निकले इस जत्थे में बड़ी संख्या में किसान नेता और कार्यकर्ता शामिल हैं। प्रमुख नामों में मोनू प्रधान, रजनी सलावत, यीशु राणा, विनीत कुमार, याकूब, नितिन, अशोक कुमार, कल्याण सिंह, विकास कुमार, मुनेंद्र सिंह काकरान, अरुण कुमार और कोमन सिंह शामिल हैं।

किसानों का कहना है कि यह सिर्फ एक पंचायत नहीं, बल्कि न्याय की लड़ाई का निर्णायक चरण है।

राकेश टिकैत के संबोधन से बढ़ेगी सियासी गर्मी

महापंचायत का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय नेता राकेश टिकैत का संबोधन होगा। सूत्रों के मुताबिक, इस मंच से बड़े आंदोलन, धरना-प्रदर्शन या दिल्ली कूच जैसी रणनीति का ऐलान किया जा सकता है।

पुलिस-प्रशासन पर बढ़ता दबाव

  • आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए
  • किसान संगठनों ने इसे “न्याय में देरी = न्याय से इनकार” बताया
  • महापंचायत के बाद प्रदेश सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ना तय

विश्लेषण: क्यों बन सकता है यह आंदोलन टर्निंग पॉइंट?

✔️ किसानों की एकजुटता ने मुद्दे को बड़ा बना दिया है
✔️ सोशल मीडिया और ग्राउंड प्रेशर तेजी से बढ़ रहा है
✔️ अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर फैल सकता है
✔️ विपक्ष भी इस मुद्दे को भुना सकता है

किसानों का साफ संदेश

“दिव्यांशु को न्याय दिलाना ही अब हमारा लक्ष्य है, और इसके लिए हम हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।”

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें देहरादून महापंचायत पर टिकी हैं। राकेश टिकैत के ऐलान और प्रशासन की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि यह आंदोलन कितना बड़ा रूप लेता है।

निष्कर्ष

दिव्यांशु हत्याकांड ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देहरादून की यह महापंचायत आने वाले दिनों में किसान आंदोलन की दिशा और सरकार की चुनौती दोनों तय कर सकती है।

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