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UP में 4 साल बाद ‘सुपर कॉप’ की ताजपोशी! 18 नाम UPSC में, कौन बनेगा नया DGP?

UP में ‘सुपर कॉप’ की जंग तेज! 4 साल बाद स्थायी DGP की नियुक्ति फाइनल स्टेज पर, UPSC के पास 18 नाम — कौन बनेगा प्रदेश का नया पुलिस मुखिया?

लखनऊ | एक्सक्लूसिव एनालिसिस

उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था में सबसे बड़े पद—पुलिस महानिदेशक (DGP)—की स्थायी नियुक्ति को लेकर चल रहा लंबा इंतजार अब खत्म होने की कगार पर है। करीब चार वर्षों से जारी अस्थायी व्यवस्था के बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए 18 वरिष्ठ IPS अधिकारियों की सूची संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेज दी है।

इस कदम के साथ ही प्रदेश में “कौन बनेगा DGP?” की सियासी और प्रशासनिक चर्चा तेज हो गई है।

UPSC की कसौटी पर होंगे अफसर, ऐसे चुना जाएगा DGP

DGP चयन की प्रक्रिया पूरी तरह संस्थागत और पारदर्शी मानी जाती है। इसमें:

  • राज्य सरकार द्वारा भेजी गई सूची की UPSC गहन समीक्षा करता है
  • अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, सीनियरिटी, विजिलेंस क्लियरेंस और अनुभव का मूल्यांकन होता है
  • इसके आधार पर 3 नामों का पैनल तैयार किया जाता है
  • अंतिम फैसला राज्य सरकार करती है

👉 यही वजह है कि इस प्रक्रिया को राजनीतिक प्रभाव से काफी हद तक मुक्त माना जाता है।

रेस में कौन आगे? ये हैं सबसे बड़े दावेदार

UP के नए DGP पद के लिए कई बड़े और अनुभवी नाम चर्चा में हैं:

 रेणुका मिश्रा (1990 बैच)

  • सबसे वरिष्ठ अधिकारी
  • प्रशासनिक पकड़ और अनुभव मजबूत
  • सीनियरिटी के आधार पर सबसे आगे मानी जा रही हैं

 आलोक शर्मा

  • कानून-व्यवस्था संभालने में दक्ष
  • कई अहम पदों पर काम करने का अनुभव

 पीयूष आनंद

  • फील्ड में मजबूत पकड़
  • ऑपरेशनल क्षमता के लिए चर्चित

 राजीव कृष्णा (कार्यवाहक DGP)

  • वर्तमान में जिम्मेदारी संभाल रहे
  • सिस्टम और ग्राउंड रियलिटी की गहरी समझ

👉 इसके अलावा भी सूची में कुल 18 वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

4 साल की देरी: सिस्टम की मजबूरी या रणनीति?

पिछले चार वर्षों से UP में स्थायी DGP की नियुक्ति न होना कई सवाल खड़े करता रहा है। इसके पीछे प्रमुख कारण:

  • सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा-निर्देश
  • पात्रता और सीनियरिटी को लेकर जटिलता
  • प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर सहमति में देरी

👉 इस दौरान कार्यवाहक DGP के जरिए काम चलता रहा, लेकिन स्थायी नेतृत्व की कमी लगातार महसूस की गई।

क्यों अहम है स्थायी DGP की नियुक्ति?

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और संवेदनशील राज्य में DGP की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। स्थायी नियुक्ति से:

  • पुलिस विभाग को स्थिर और दीर्घकालिक नेतृत्व मिलेगा
  • अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था में सतत रणनीति लागू होगी
  • बड़े फैसलों में तेजी और जवाबदेही बढ़ेगी
  • अधिकारियों और जवानों का मनोबल मजबूत होगा

👉 खासकर चुनावी माहौल और बढ़ते अपराधी नेटवर्क के बीच यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

पावर, परफॉर्मेंस और पॉलिटिक्स—तीनों का संतुलन

DGP की कुर्सी सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी होती है। चयन में तीन बड़े फैक्टर अहम रहते हैं:

  • Power (प्रभाव और नेतृत्व क्षमता)
  • Performance (सेवा रिकॉर्ड और उपलब्धियां)
  • Politics (सरकार के साथ तालमेल)

👉 ऐसे में अंतिम चयन सिर्फ सीनियरिटी से नहीं, बल्कि “ऑल-राउंड प्रोफाइल” से तय होगा।

अब आगे क्या? कब मिलेगा नया DGP?

  • UPSC जल्द ही 3 नामों का पैनल तैयार करेगा
  • यह पैनल राज्य सरकार को भेजा जाएगा
  • इसके बाद किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लगेगी

👉 अनुमान है कि आने वाले कुछ हफ्तों में उत्तर प्रदेश को नया स्थायी DGP मिल सकता है।

निष्कर्ष: क्या बदलेगी UP पुलिस की दिशा?

चार साल बाद स्थायी DGP की नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था के भविष्य को तय करने वाला कदम है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अनुभव, सीनियरिटी और रणनीतिक समझ के इस मुकाबले में आखिर किस अफसर के सिर “UP का टॉप कॉप” बनने का ताज सजता है।

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