“21 अप्रैल को देशभर में पेंशनर्स का महाआंदोलन! 8वें वेतन आयोग से लेकर DA एरियर तक—सरकार पर बढ़ा दबाव”
अमरोहा से उठी आवाज, अब बनेगी राष्ट्रीय लहर
अमरोहा। पेंशनर्स की लंबित और ज्वलंत समस्याओं को लेकर अब देशभर में बड़ा आंदोलन खड़ा होने जा रहा है। पेंशनर्स संगठनों ने 21 अप्रैल 2026 को सभी जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस आंदोलन के माध्यम से केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को 12 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा जाएगा, जिसमें पेंशन से जुड़े कई अहम मुद्दे शामिल हैं।
अमरोहा जनपद में भी इस आंदोलन को लेकर व्यापक तैयारी शुरू हो चुकी है। पेंशनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जिले के सभी पेंशनर्स से एकजुट होकर इस आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।
क्या हैं पेंशनर्स की बड़ी मांगें?
पेंशनर्स द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार से भी जुड़े हैं। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- ✔️ 8वें वेतन आयोग का लाभ पेंशनर्स को भी दिया जाए
- ✔️ वित्त विधेयक 2025 को वापस लिया जाए
- ✔️ पेंशन राशिकरण कटौती अवधि 15 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष की जाए
- ✔️ कोरोना काल (18 माह) का लंबित महंगाई राहत (DA) एरियर दिया जाए
- ✔️ हर 5 साल में 5% पेंशन वृद्धि का प्रावधान लागू हो
- 65 वर्ष पर 5%
- 70 वर्ष पर 10%
- 75 वर्ष पर 15%
- 80 वर्ष पर 20%
विश्लेषण: क्यों उबल रहा है पेंशनर्स का असंतोष?
देश में लाखों पेंशनर्स लंबे समय से आर्थिक असमानता और महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं।
👉 कोरोना काल के दौरान रोके गए 18 माह के DA एरियर ने सबसे ज्यादा असंतोष पैदा किया है।
👉 8वें वेतन आयोग को लेकर अनिश्चितता भी चिंता का विषय बनी हुई है।
👉 वहीं, पेंशन राशिकरण कटौती की लंबी अवधि को अन्यायपूर्ण बताया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन मांगों पर समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
अमरोहा में क्या होगा?
- 📍 स्थान: कलेक्ट्रेट परिसर, शहीद पार्क, अमरोहा
- तारीख: 21 अप्रैल 2026
- कार्यक्रम: धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपना (जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को)
इसके अलावा, 30 मार्च से पेंशनर्स के हस्ताक्षरों से युक्त 1000 सदस्यों की याचिका भी केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।
संगठन की अपील
पेंशनर्स एसोसिएशन अमरोहा के पदाधिकारियों—अनूप सिंह पैसल (अध्यक्ष), शिवेन्द्र सिंह चिकारा (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), राजेंद्र सिंह राणा (जिला मंत्री) और अमीपाल सिंह (उपाध्यक्ष)—ने सभी पेंशनर्स से एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेने की अपील की है।
राजनीतिक और आर्थिक असर क्या होगा?
यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है जब देश में महंगाई और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पहले से ही चर्चा में हैं।
👉 अगर आंदोलन व्यापक हुआ, तो यह सरकार पर वित्तीय और राजनीतिक दोनों स्तर पर दबाव बना सकता है।
👉 आगामी नीतियों और बजट निर्णयों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष: क्या सरकार सुनेगी ‘साइलेंट सेक्टर’ की आवाज?
पेंशनर्स को अक्सर “साइलेंट सेक्टर” माना जाता है, लेकिन अब यह वर्ग खुलकर अपनी मांगों के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है। 21 अप्रैल का यह राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन सरकार के लिए एक बड़ा संकेत हो सकता है कि पेंशन नीति में बदलाव की जरूरत है।
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