‘हर घूंट में जहर, हर घर में बीमारी’ — अमरोहा की बगद नदी बनी मौत की धारा, 62 दिन से सड़क पर किसान, नमामि गंगे जांच से खुलेंगे राज!

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अवनीश त्यागी की ग्राउंड रिपोर्ट:
अमरोहा में पानी नहीं, जहर पी रही पूरी पीढ़ी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले का गजरौला क्षेत्र इस समय एक भयावह पर्यावरणीय त्रासदी से गुजर रहा है। यहां से बहने वाली बगद नदी, जो कभी जीवन का आधार थी, अब मौत का कारण बनती जा रही है।
नदी किनारे बसे नाईपुरा, बसैली और शहबाजपुर डोर गांवों में पानी पीला, बदबूदार और जहरीला हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि इस पानी को पीने के बाद लोग कैंसर, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के नमामि गंगे कार्यक्रम की टीम ने 20 फरवरी को छह सदस्यीय जांच समिति के साथ मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। जांच समिति की अध्यक्षता पीसीएस अधिकारी चंद्रकांता ने की।
डरावना सच: कैंसर, मौत और बर्बादी का ‘जहरीला चक्र’
ग्रामीणों के अनुसार हालात इतने खराब हैं कि—
- गांवों में कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं
- दुधारू पशु अचानक मर रहे हैं
- खेतों की उपज 50% से ज्यादा घट चुकी है
- भूजल पूरी तरह दूषित हो चुका है
एक ग्रामीण ने दर्द बयां करते हुए कहा—
“हम पानी नहीं, जहर पी रहे हैं। हमें समझ नहीं आता कि हम जिंदा कैसे हैं।”
62 दिन से धरना: “यह आंदोलन नहीं, अस्तित्व बचाने की जंग है”
शहबाजपुर डोर में भारतीय किसान यूनियन (संयुक्त मोर्चा) के नेतृत्व में बेमियादी धरना अब 62वें दिन में पहुंच गया है।
कड़ाके की ठंड, बारिश और तेज धूप के बावजूद किसान सड़क पर बैठे हैं।
किसान नेता नरेश चौधरी ने कहा—
“यह सिर्फ जल संकट नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों की हत्या है। बच्चे पूछते हैं — क्या हमारा भविष्य भी जहर में डूबा होगा?”
प्रदेशाध्यक्ष रामकृष्ण चौहान ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा—
“बजट सत्र में बड़े-बड़े भाषण हुए, लेकिन हमारे जहर वाले पानी पर कोई चर्चा नहीं हुई।”
चौंकाने वाला दावा: 70% आबादी जहरीला पानी पीने को मजबूर
धरना दे रहे किसान नेताओं का दावा है—
- बगद नदी किनारे 70% लोग दूषित पानी पी रहे हैं
- प्रशासन को कई बार शिकायत दी गई
- लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ
अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी एहसान अली ने कहा—
“क्या हमारा जीवन इतना सस्ता है? क्या किसान सिर्फ वोट देने के लिए हैं?”
नमामि गंगे टीम की जांच: क्या अब मिलेगी राहत?

नमामि गंगे की जांच टीम ने—
- प्रभावित गांवों का दौरा किया
- ग्रामीणों के बयान दर्ज किए
- पानी और मिट्टी के नमूने लेने की प्रक्रिया शुरू की
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होगी।
लेकिन ग्रामीणों का भरोसा अब टूट चुका है।
एक्सपर्ट व्यू: यह ‘साइलेंट पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ है
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार—
- यह मामला सिर्फ प्रदूषण नहीं
- बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है
अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो—
- पूरी पीढ़ी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकती है
- यह भारत की सबसे बड़ी ग्रामीण जल त्रासदियों में से एक बन सकता है
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
इस पूरे मामले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या औद्योगिक प्रदूषण इसके पीछे है?
- क्या प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की?
- क्या ग्रामीणों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं?
अब फैसला सरकार के हाथ में
अमरोहा की बगद नदी अब सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन चुकी है।
नमामि गंगे की जांच के बाद—
✔ क्या कारखानों पर कार्रवाई होगी?
✔ क्या लोगों को साफ पानी मिलेगा?
✔ या यह आंदोलन और बड़ा विस्फोट बनेगा?
पूरा क्षेत्र अब जवाब का इंतजार कर रहा है।











