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बिजनौर में गूंजा किसान हित का संकल्प, ‘आज भी प्रासंगिक हैं चौधरी साहब की नीतियां’

चौधरी चरण सिंह जयंती: बिजनौर में गूंजा किसान हित का संकल्प, ‘आज भी प्रासंगिक हैं चौधरी साहब की नीतियां’

हवन, माल्यार्पण और विचार गोष्ठियों के जरिए याद किए गए भारत रत्न चौधरी चरण सिंह, रालोद नेताओं ने युवाओं से जोड़ा किसान चिंतन

रिपोर्ट। अवनीश त्यागी 

बिजनौर | भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर बिजनौर में किसान चेतना, सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण से जुड़े उनके विचार एक बार फिर केंद्र में रहे। नुमाइश ग्राउंड स्थित चौधरी चरण सिंह चौक पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के कार्यकर्ताओं और चौधरी साहब के अनुयायियों ने हवन-यज्ञ कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी नीतियों को वर्तमान समय में अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का आयोजन रालोद के कार्यवाहक जिला अध्यक्ष नरेंद्र सिंह आचार्य के नेतृत्व में किया गया। हवन का आयोजन राधेश्याम चिकारा एडवोकेट एवं ब्रजवीर आर्य के माध्यम से संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने आहुति दी।

‘किसान, गांव और गरीब’ की राजनीति का प्रतीक थे चौधरी चरण सिंह

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह आचार्य ने कहा कि चौधरी चरण सिंह केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि किसान और ग्रामीण भारत की आवाज थे।
उन्होंने कहा, “आज के दौर में युवाओं को चौधरी साहब के आदर्शों और नीतियों से जोड़ना बेहद जरूरी है। जमींदारी उन्मूलन से लेकर किसान हितों की लड़ाई तक, उन्होंने समाज और राष्ट्र निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।”

आचार्य ने चौधरी चरण सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में जेल जाना और सत्ता में रहते हुए भी किसानों के पक्ष में खड़े रहना, उन्हें विशिष्ट बनाता है।

‘जिन्हें भुलाया नहीं जा सकता’—नेताओं की एक स्वर में श्रद्धांजलि

पूर्व जिला अध्यक्ष अशोक चौधरी ने चौधरी चरण सिंह के जीवन संघर्ष और सिद्धांतों को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी राजनीति नैतिक मूल्यों पर आधारित थी।

रालोद के प्रदेश महासचिव चौधरी ब्रजवीर सिंह ने कहा,
“चौधरी साहब ने हर वर्ग, खासकर किसानों के लिए ऐसे कार्य किए जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी नीतियों का प्रचार-प्रसार आज की सबसे बड़ी जरूरत है।”

वहीं राधेश्याम चिकारा एडवोकेट ने चौधरी चरण सिंह की आर्थिक और कृषि नीतियों पर विश्लेषणात्मक चर्चा करते हुए उन्हें आज भी प्रासंगिक बताया।

कृषि सुधारों के मजबूत पक्षधर, किसानों के दिलों में जीवित

कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि चौधरी चरण सिंह कृषि व्यवस्था में सुधार के बड़े पक्षधर थे। किसान, खेत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था उनकी राजनीति के केंद्र में रहे।
कार्यकर्ताओं और अनुयायियों ने उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हुए कहा कि “चौधरी चरण सिंह आज भी हर किसान के दिल में बसे हैं।”

जिलेभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम, शिक्षण संस्थानों में भी नमन

जयंती के अवसर पर जिले की विभिन्न शिक्षण संस्थानों में भी चौधरी चरण सिंह को नमन किया गया। स्कूलों में विद्यार्थियों को उनके जीवन, संघर्ष और किसान हितैषी नीतियों की जानकारी दी गई।
इसके अलावा रालोद कार्यकर्ताओं ने गंगा बैराज स्थित चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

ये रहे प्रमुख उपस्थित

कार्यक्रम में डॉ. नीरज चौधरी, डॉ. मधु चौधरी, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष रेणुका चौधरी, बलजीत शास्त्री, वरिष्ठ नेता अलबेल सिंह, यशपाल सिंह, ओम सिंह, चौधरी हरवीर सिंह, गन्ना समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह उर्फ कालू, शिवम राणा (युवा प्रकोष्ठ महासचिव) सहित बड़ी संख्या में रालोद नेता, कार्यकर्ता और चौधरी चरण सिंह के अनुयायी मौजूद रहे।

निष्कर्ष | विश्लेषण

बिजनौर में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संदेश भी देता है कि किसान-केंद्रित राजनीति और सामाजिक न्याय की सोच आज भी उतनी ही जरूरी है जितनी चौधरी चरण सिंह के दौर में थी। बदलते राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में उनकी नीतियों की पुनर्व्याख्या और क्रियान्वयन ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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