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साहित्य की शाम में चमकी सुशी सक्सेना की कलम: ‘किताबों की दुनिया’ में रचनाओं पर हुई गहन चर्चा

साहित्य की शाम में चमकी सुशी सक्सेना की कलम: ‘किताबों की दुनिया’ में रचनाओं पर हुई गहन चर्चा

श्रीराम सेवा साहित्य संस्थान के मंच पर हुआ जीवंत संवाद — लेखिका ने की पुस्तकों के अंशों का वाचन, साहित्यप्रेमियों ने की सराहना

📍 नई दिल्ली।
बीती रात्रि साहित्य और संवेदना से सराबोर माहौल में ‘किताबों की दुनिया में सुशी सक्सेना’ विषय पर एक विशेष चर्चा कार्यक्रम का सफल आयोजन हुआ। यह आयोजन श्रीराम सेवा साहित्य संस्थान भारत के मंच पर संपन्न हुआ, जिसमें जानी-मानी लेखिका सुशी सक्सेना स्वयं उपस्थित रहीं। उनके साथ मंच पर संस्थान की संस्थापिका दिव्यांजली वर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया।

रचनाओं की गूंज: साहित्य, विज्ञान और राजनीति के संगम पर सुशी सक्सेना की लेखनी

कार्यक्रम के दौरान सुशी सक्सेना की उन पुस्तकों पर विस्तृत चर्चा हुई, जो साहित्य, विज्ञान और राजनीति जैसे विविध विषयों पर केंद्रित हैं।

  • उनकी रचनाएँ नारी जीवन, सामाजिक यथार्थ, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय संवेदनाओं के गहरे पहलुओं को उकेरती हैं।
  • सरल भाषा में गहन विचार प्रस्तुत करने की उनकी शैली ने पाठकों और श्रोताओं दोनों को प्रभावित किया।

साहित्य जगत से जुड़े कई विद्वान, लेखक और पाठक इस अवसर पर उपस्थित रहे, जिन्होंने सुशी सक्सेना के लेखन को “समाज के मर्म को शब्दों में पिरोने वाली संवेदनशील आवाज़” बताया।

लेखिका ने किया अंश वाचन — कविताओं ने छुआ दिल

कार्यक्रम की विशेष झलक रही वह घड़ी, जब सुशी सक्सेना ने अपनी लोकप्रिय पुस्तकों से अंश वाचन किया और कुछ कविताएँ सुनाईं।
श्रोताओं ने उनकी कविताओं में छिपे भावनात्मक स्पर्श को सराहा और कहा कि उनकी लेखनी आम जन की संवेदनाओं को सजीव रूप में सामने लाती है।

समापन में भावनाओं की अभिव्यक्ति — निरंतर साहित्यिक संवाद की कामना

कार्यक्रम के अंत में दिव्यांजली वर्मा ने सभी प्रतिभागियों और साहित्यप्रेमियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि,

“सुशी सक्सेना जैसे रचनाकार साहित्य की वो रोशनी हैं, जो समाज को सोचने की दिशा देती हैं। ऐसे आयोजनों से साहित्य और पाठकों के बीच संवाद जीवित रहता है।”

उन्होंने इस पहल को जारी रखने की घोषणा करते हुए साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को मंच देने का संकल्प भी दोहराया।

💬 साहित्यिक महत्व:

यह आयोजन केवल एक पुस्तक चर्चा नहीं, बल्कि विचारों का उत्सव बन गया — जहाँ शब्दों ने समाज, संवेदना और सत्य के नए आयामों को स्पर्श किया।

निष्कर्ष:

‘किताबों की दुनिया में सुशी सक्सेना’ कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि साहित्य आज भी दिलों को जोड़ने की सबसे सशक्त कड़ी है
सुशी सक्सेना की लेखनी न केवल पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है, बल्कि उन्हें “बेहतर समाज और संवेदनशील दृष्टि” की ओर प्रेरित भी करती है।

कार्यक्रम की झलकियाँ और सुशी सक्सेना की कविताओं के अंश जल्द ही श्रीराम सेवा साहित्य संस्थान के आधिकारिक पेज पर उपलब्ध होंगे।

 

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