जमीन के टुकड़े ने छीन ली रिश्तों की जान — भतीजे ने चाचा की गला रेतकर हत्या, गांव में पसरा मातम
“मिट्टी की लकीर ने रिश्तों को लहूलुहान कर दिया — भरैरा में सुबह की सैर मौत का सफर बन गई”
सुबह का सन्नाटा, फिर गूंज उठी चीखें
बिजनौर जिले के गांव भरैरा में गुरुवार की सुबह एक ऐसी त्रासदी लेकर आई जिसने पूरे इलाके को दहला दिया।
सिर्फ जमीन के बंटवारे को लेकर सगे भतीजे विनीत कुमार ने अपने 65 वर्षीय चाचा नरेश कुमार की गन्ना काटने वाले धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी।
सुबह सवा सात बजे का वक्त था, जब नरेश कुमार रोज़ की तरह खेत की ओर टहलने निकले। उन्हें क्या पता था कि आज उसी खेत में, जिस पर उन्होंने उम्र बिताई, उनकी सांसें थम जाएंगी।
‘खेत की लकीर’ ने रिश्तों को बाँट दिया
गांव वालों के मुताबिक, खेत के एक हिस्से को लेकर चाचा-भतीजे के बीच विवाद पिछले कई महीनों से चल रहा था।
दोनों ही सड़क किनारे वाली ज़मीन का हिस्सा चाहते थे। यह विवाद इतना गहरा हो गया कि परिवार की बातचीत बंद, और तनाव बढ़ता चला गया।
गुरुवार की सुबह जब नरेश खेत पहुंचे, तो वहां भतीजा विनीत पहले से मौजूद था। बातों-बातों में तकरार बढ़ी और देखते ही देखते विनीत ने गन्ना काटने वाले हंसिए से वार कर दिया।
चेहरे, गर्दन और कंधे पर लगातार कई वार किए गए। नरेश लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े।
अस्पताल पहुंचने से पहले थम गई सांसें
घटना के बाद परिजन और ग्रामीण उन्हें तुरंत बिजनौर के मेडिकल अस्पताल ले गए।
लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद नरेश कुमार को मृत घोषित कर दिया।
सड़क किनारे खड़े लोगों की आंखें नम थीं, कोई यकीन नहीं कर पा रहा था कि भतीजा अपने ही चाचा का गला रेतकर चला गया।
पुलिस ने संभाली कमान — तीन नामजद, कई अज्ञात पर मुकदमा
घटना की जानकारी मिलते ही एसपी अभिषेक झा, एएसपी सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल सिंह, और कोतवाल धर्मेंद्र सोलंकी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
मुआयना करने के बाद पुलिस ने तीन लोगों को नामजद करते हुए कई अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
मुख्य आरोपी विनीत कुमार फरार है। पुलिस टीमों ने गांव और आसपास के क्षेत्रों में दबिशें तेज कर दी हैं।
परिवार पर टूटा पहाड़
मृतक नरेश कुमार के बेटे की तैनाती सीआईएसएफ में दरोगा के पद पर दिल्ली एयरपोर्ट पर है।
बेटी की शादी हो चुकी है, घर में अब सिर्फ बुजुर्ग पत्नी और वृद्ध माता-पिता हैं।
जब बेटे को फोन पर पिता की हत्या की खबर दी गई, तो वह फूट-फूट कर रो पड़ा।
गांव में शोक की लहर दौड़ गई, हर आंख नम है।
ग्रामीण बोले — “ये सिर्फ हत्या नहीं, इंसानियत की मौत है”
गांव भरैरा के प्रधान ने बताया,
“नरेश भाई बहुत शांत स्वभाव के थे। उन्होंने कभी किसी से ऊंची आवाज़ में बात तक नहीं की। ये जमीन ही है जो अब लोगों को पागल बना रही है… रिश्तों में ज़हर घोल रही है।”
एक बुजुर्ग ने कहा,
“पहले लोग खेतों को जोतते थे, अब खेत ही उन्हें जोत रहे हैं।”
विश्लेषणात्मक नज़र — ज़मीन की ज़िद कैसे बन रही है ज़िंदगियों की दुश्मन
- यूपी और उत्तर भारत के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में बंटवारे और सीमांकन को लेकर हत्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
- परिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए ग्राम स्तर पर मध्यस्थता प्रणाली कमजोर पड़ चुकी है।
- ज्यादातर मामलों में विवाद भावनात्मक नहीं, आर्थिक स्वार्थों से प्रेरित होता है।
- समाजशास्त्रियों का कहना है —
“जहां रिश्तों से ऊपर संपत्ति आ जाए, वहां विनाश तय है।”
“मिट्टी की कीमत जान से चुकाई” — एक गांव, एक सबक
भरैरा गांव अब सन्नाटे में डूबा है। घरों के बाहर पुलिस, भीतर मातम।
लोग फुसफुसा कर सिर्फ एक बात कह रहे हैं —
“कौन जानता था, खेत की मेड़ एक दिन खून से लाल हो जाएगी।”
समापन पंक्ति:
यह सिर्फ एक पारिवारिक हत्या नहीं — यह उस समाज की चेतावनी है जो ज़मीन के टुकड़े के लिए खून बहाने लगा है। जब मिट्टी रोटी देने के बजाय रिश्ते निगलने लगे, तो समझो इंसानियत खतरे में है










