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गांव की सरकार अब डिजिटल निगरानी में, पंचायत सचिव और वी.डी.ओ. को देनी होगी ऑनलाइन उपस्थिति

अब ग्राम पंचायतों में नहीं चलेगी “हाज़िरी की मनमानी” — यूपी सरकार का बड़ा डिजिटल कदम

गांव की सरकार अब डिजिटल निगरानी में, पंचायत सचिव और वी.डी.ओ. को देनी होगी ऑनलाइन उपस्थिति
रिपोर्ट । अवनीश त्यागी 

📌 मुख्य बिंदु

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम पंचायतों में ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम लागू करने का आदेश जारी किया।
  • अब सभी ग्राम पंचायत अधिकारी (GPO) और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) देंगे बायोमेट्रिक या ऑनलाइन हाज़िरी।
  • शासनादेश 31 अक्टूबर 2025 को विशेष सचिव राजेश कुमार त्यागी द्वारा जारी।
  • जिलाधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारियों को कहा गया — “कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।”
  • पंचायतों के कामकाज में डिजिटल पारदर्शिता और जवाबदेही का नया अध्याय शुरू।

गांव की सरकार में डिजिटल अनुशासन की शुरुआत

लखनऊ से आई खबर ने पंचायत तंत्र में हलचल मचा दी है।
राज्य सरकार ने तय किया है कि अब ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) बिना ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज किए अपने काम की शुरुआत नहीं कर सकेंगे।

यह आदेश सिर्फ “हाज़िरी” तक सीमित नहीं है — यह ग्राम स्तर पर शासन की पकड़ मजबूत करने, योजनाओं की निगरानी करने और भ्रष्टाचार पर नकेल कसने का डिजिटल औज़ार बन सकता है।

राज्य सरकार का मानना है कि जब जवाबदेही डिजिटल होगी, तो लापरवाही और मनमानी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

क्या है आदेश की पूरी कहानी

31 अक्टूबर 2025 को पंचायतीराज विभाग के विशेष सचिव राजेश कुमार त्यागी ने शासनादेश संख्या 33-1-2025 जारी किया।
इस आदेश में कहा गया है कि —

“प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में कार्यरत ग्राम पंचायत अधिकारियों एवं ग्राम विकास अधिकारियों की उपस्थिति अब बायोमेट्रिक या ऑनलाइन मोड में दर्ज की जाएगी।”

इस आदेश को ग्राम्य विकास विभाग की सहमति से जारी किया गया है।
साथ ही सभी जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों, और पंचायत राज अधिकारियों को इसकी सूचना भेज दी गई है, ताकि ज़मीनी स्तर पर इसे तत्काल लागू किया जा सके।

कैसे काम करेगा ‘ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम’

  • हर ग्राम पंचायत में नियुक्त अधिकारी अपनी दैनिक उपस्थिति ऑनलाइन पोर्टल या मोबाइल ऐप पर दर्ज करेंगे।
  • अधिकारियों की जियो-लोकेशन और टाइम स्टैम्प से यह पुष्टि होगी कि वे वास्तव में फील्ड में मौजूद हैं।
  • यह डेटा सीधे राज्य स्तर के सर्वर पर अपलोड होगा, जहां वरिष्ठ अधिकारी इसकी रीयल टाइम मॉनिटरिंग कर सकेंगे।
  • अनुपस्थित या फर्जी उपस्थिति दर्ज करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

क्यों ज़रूरी पड़ी यह व्यवस्था

ग्राम पंचायतें गांवों के विकास का पहला और सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक ढांचा हैं, लेकिन लंबे समय से इन पर “अनुपस्थित अधिकारी, कागज़ों में हाज़िरी, और आधे-अधूरे कार्यों” के आरोप लगते रहे हैं।

सरकार के अनुसार,

“जब अधिकारी अपनी उपस्थिति डिजिटल माध्यम से दर्ज करेंगे, तो न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि जनता को योजनाओं का वास्तविक लाभ भी मिलेगा।”

इस कदम से उन अधिकारियों की पहचान होगी जो वाकई फील्ड में मेहनत कर रहे हैं, और उन पर लगाम लगेगी जो केवल वेतन उठा रहे हैं, काम नहीं कर रहे।

इस आदेश से क्या बदलेगा — एक नज़र में

  1.  जवाबदेही तय होगी — कौन अधिकारी कितने समय गांव में रहता है, अब सिस्टम खुद बताएगा।
  2. पारदर्शिता बढ़ेगी — मैन्युअल हाज़िरी का खेल खत्म, सब कुछ डिजिटल।
  3.  फर्जी उपस्थिति पर रोक — सिस्टम जियो टैगिंग से लोकेशन भी ट्रैक करेगा।
  4.  विकास योजनाओं की रफ्तार बढ़ेगी — अधिकारी फील्ड में होंगे तो योजनाएं भी समय पर पूरी होंगी।
  5.  शासन को रीयल टाइम डेटा मिलेगा — निर्णय और निगरानी दोनों तेज़ होंगे।

फील्ड से आवाज़ें

कई पंचायत सचिवों और ग्राम विकास अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —

“यह व्यवस्था उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो ईमानदारी से काम करते हैं। अब जो फील्ड में नहीं जाएंगे, वे खुद एक्सपोज़ हो जाएंगे।”

वहीं, कुछ अधिकारियों ने आशंका जताई कि ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिवाइस की कमी सिस्टम की सफलता में बाधा बन सकती है।

विश्लेषणात्मक दृष्टि से

इस आदेश से ग्राम पंचायत प्रशासन में एक नया ई-गवर्नेंस मॉडल आकार लेता दिख रहा है।
यह न केवल प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करेगा बल्कि जनविश्वास को भी बढ़ाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में डिजिटल ग्राम पंचायत मिशन की नींव साबित हो सकता है।

जनता की उम्मीदें

गांव के लोगों में उम्मीद है कि जब अधिकारी रोज़ाना उपस्थिति देंगे, तो गांवों में

  • सफाई अभियान,
  • मनरेगा भुगतान,
  • आवास योजना,
  • शौचालय निर्माण,
  • और जल जीवन मिशन जैसे कार्यों में गति और पारदर्शिता दोनों आएंगी।

एक ग्रामीण ने कहा —

“अब पता चलेगा कि हमारा सचिव कब आता है, कब जाता है। काम में तेजी आएगी तो गांव भी चमकेंगे।”

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला केवल “ऑनलाइन हाज़िरी” नहीं, बल्कि
“ग्राम प्रशासन में डिजिटल क्रांति” की शुरुआत है।
अगर यह सिस्टम प्रभावी रूप से लागू हो गया, तो यूपी के गांवों में
जवाबदेही, अनुशासन और विकास — तीनों का नया युग शुरू होगा।

✍️ रिपोर्ट : डिजिटल डेस्क |  टारगेट टीवी न्यूज़ नेटवर्क

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