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बिजली निजीकरण पर मचा घमासान: कर्मचारी बोले – उपभोक्ताओं के खिलाफ है निजी घरानों की मोनोपॉली

यूपी में बिजली निजीकरण पर मचा घमासान:
कर्मचारी बोले – उपभोक्ताओं के खिलाफ है निजी घरानों की मोनोपॉली

लखनऊ, 11 सितंबर 2025।
उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण निगमों के निजीकरण को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मोर्चा खोल दिया है। समिति ने कहा है कि यह कदम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के हित में नहीं है और अगर इसे लागू किया गया तो इसका नतीजा वही होगा जो दिल्ली, उड़ीसा और आगरा में देखने को मिला था।

 निजी मोनोपॉली से उपभोक्ता ठगे जाएंगे

संघर्ष समिति ने साफ कहा कि बिजली क्षेत्र के बड़े विशेषज्ञ भी इस बात पर सहमत हैं कि निजी घरानों की मोनोपॉली किसी भी कीमत पर उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद नहीं है

  • निजी कंपनियों को सीएजी ऑडिट से मुक्त रखा गया है, जिससे उनके मुनाफे और घाटे का असली हिसाब सामने नहीं आ पाता।
  • मुनाफा निजी कंपनियों की जेब में जाता है, जबकि उपभोक्ता लगातार बढ़ी हुई दरों का बोझ उठाते हैं।

दिल्ली, उड़ीसा और आगरा की मिसाल

समिति ने कहा कि यूपी सरकार उन्हीं गलतियों को दोहराने जा रही है, जो दिल्ली और उड़ीसा में निजीकरण के समय हुई थीं।

  • अरबों-खरबों की सरकारी परिसंपत्तियां निजी घरानों को कौड़ियों के भाव सौंप दी गईं।
  • उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने का वादा किया गया, लेकिन इसके उलट बिजली दरें बढ़ीं
  • आगरा केस – टोरेंट पावर कंपनी ने उपभोक्ताओं पर 2200 करोड़ रुपये का बकाया आज तक पॉवर कॉरपोरेशन को नहीं दिया।

 चंडीगढ़ का ताजा उदाहरण

चंडीगढ़ का अनुभव भी बिजली निजीकरण की सच्चाई उजागर करता है।

  • सरकारी प्रबंधन में 6 वर्षों तक बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं हुई, फिर भी लाभ हो रहा था।
  • निजी कंपनी के हाथ में प्रबंधन आते ही 6 महीने में ही दरें बढ़ाने का प्रस्ताव नियामक आयोग को भेज दिया गया
  • सवाल यह उठता है कि अगर सुधार हुआ तो उसका लाभ उपभोक्ताओं को क्यों नहीं मिला?

 पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

विशेषज्ञों ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में कई गड़बड़ियों की ओर इशारा किया है –

  • ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट के चयन में पारदर्शिता की कमी, जिससे आरएफपी डॉक्यूमेंट कुछ खास निजी घरानों के हित में तैयार किए गए।
  • निजीकरण से पहले आउटस्टैंडिंग ड्यूज और परिसंपत्तियों का मूल्यांकन वास्तविक से बहुत कम दिखाया गया।
  • एटी एंड सी हानियों को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, ताकि निजी कंपनियों को सीधा फायदा हो और सरकार को अरबों का नुकसान उठाना पड़े।

 आंदोलन 288वें दिन भी जारी

संघर्ष समिति का आंदोलन यूपी में लगातार तेज़ हो रहा है।

  • आज 288वें दिन बिजली कर्मियों ने पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किया।
  • वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, बरेली, अलीगढ़, मथुरा, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, सहारनपुर और अन्य जिलों में जोरदार प्रदर्शन हुए।
  • कर्मचारियों का कहना है कि यदि निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और उग्र होगा।

❓ जनता के सामने बड़े सवाल

  • क्या यूपी सरकार दिल्ली और उड़ीसा की गलतियों को दोहराने जा रही है?
  • क्यों निजी कंपनियों को सीएजी ऑडिट से बाहर रखा गया है?
  • अगर निजी कंपनियां मुनाफे में हैं तो बिजली दरें क्यों नहीं घट रही, बल्कि हर साल बढ़ रही हैं?

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और विशेषज्ञों की राय साफ है – निजीकरण उपभोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों के खिलाफ है। दिल्ली, उड़ीसा और आगरा का अनुभव यह साबित करता है कि निजी घरानों को फायदा हुआ, जबकि आम जनता ठगी गई। अब देखना यह होगा कि यूपी सरकार इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है या फिर इतिहास को दोहराने की तैयारी कर रही है।

 

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