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निजीकरण की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ऊर्जा कर्मियों का उबाल

निजीकरण की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ऊर्जा कर्मियों का उबाल

मुख्यमंत्री योगी ने गोरखपुर में डिस्टिलरी प्लांट का किया लोकार्पण


— विशेष संवाददाता

लखनऊ/गोरखपुर।
उत्तर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था इन दिनों एक दोहरे घटनाक्रम के केंद्र में है। एक ओर जहां राजधानी लखनऊ में विद्युत विभाग के कर्मचारियों की संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण की प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में ₹1,200 करोड़ की लागत से बने सुपर मेगा प्रोजेक्ट—एक अनाज आधारित डिस्टिलरी प्लांट—का लोकार्पण किया।

निजीकरण पर बिजली कर्मियों का आक्रोश

संघर्ष समिति का आरोप है कि निजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता का घोर अभाव है और पूरी प्रक्रिया पहले से तय निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही है। समिति के अनुसार, अवैध रूप से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ‘ग्रान्ट थॉर्टन’ की टीम पॉवर कारपोरेशन के निदेशक (वित्त) के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रही है।

संघर्ष समिति का दावा है कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों की एटी एंड सी (AT&C) हानियों को जानबूझकर 40 प्रतिशत दिखाया गया है, जबकि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री स्वयं 2023-24 में यह हानि केवल 16.5 प्रतिशत बताकर ट्वीट कर चुके हैं। समिति ने इसे ‘भारी भ्रष्टाचार और लूट का संकेत’ बताया है।

इसके साथ ही समिति ने यह भी आरोप लगाया कि निजी कंपनियों को पहले ही गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए हैं और रिपोर्ट पहले से तैयार है। आगामी 9 अप्रैल को लखनऊ में एक विशाल रैली आयोजित कर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री का विकास एजेंडा: गीडा में डिस्टिलरी प्लांट का उद्घाटन

इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में गीडा क्षेत्र के सेक्टर-26 में एक अत्याधुनिक अनाज आधारित डिस्टिलरी प्लांट का लोकार्पण किया। यह प्लांट 30 एकड़ भूमि पर फैला है और इसकी लागत ₹1,200 करोड़ बताई जा रही है। इस परियोजना से पूर्वांचल में औद्योगिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है, साथ ही रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री के इस लोकार्पण कार्यक्रम को सरकार की औद्योगिक नीति की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण यूट्यूब के माध्यम से भी किया गया, जिससे राज्य भर में लोगों ने इसे देखा।

राजनीतिक और सामाजिक संतुलन की चुनौती

जहां एक ओर राज्य सरकार औद्योगिक विकास और निजी निवेश के नए द्वार खोलने का दावा कर रही है, वहीं बिजली कर्मियों और अभियंताओं का विरोध यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर सरकार को अपनी नीतियों को लेकर अधिक संवाद की आवश्यकता है।

निजीकरण का मुद्दा एक ओर आर्थिक सुधार का प्रतीक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर इसमें पारदर्शिता और कर्मचारी हितों की अनदेखी सरकार के खिलाफ जन असंतोष को जन्म दे सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दोनों ध्रुवों—विकास और विरोध—के बीच किस प्रकार संतुलन साधते हैं।

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