भ्रष्टाचार का घिनौना चेहरा: RES की महिलाकर्मी ने लगाया शोषण का आरोप
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बलरामपुर: उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन और महिला सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ताजा मामला बलरामपुर जिले के ग्रामीण अभियंत्रण विभाग से जुड़ा है, जहां श्रावस्ती से स्थानांतरित होकर आईं महिला कर्मचारी नेहा वर्मा को जॉइनिंग देने में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
नेहा वर्मा, जो पहले श्रावस्ती जिले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थीं, उनका स्थानांतरण बलरामपुर जिले में हुआ। नियमानुसार, उन्होंने ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, बलरामपुर में कार्यभार ग्रहण करने के लिए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। लेकिन उन्हें जॉइनिंग नहीं दी गई।
आरोप है कि प्रधान सहायक उमेश शुक्ला और कमल किशोर ने उन्हें कार्यभार ग्रहण करने से रोक दिया। नेहा वर्मा के अनुसार, उमेश शुक्ला ने जॉइनिंग के बदले अनुचित मांगें रखीं—₹20,000 नकद और एक लड़की। यह आरोप न केवल शर्मनाक है, बल्कि सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें उजागर करता है।
महिला सशक्तिकरण की धज्जियां
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर सख्त रुख अपनाने का दावा करते हैं। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन सरकारी दफ्तरों में जब महिला कर्मचारियों को इस तरह से प्रताड़ित किया जाएगा, तो महिलाओं के प्रति सुरक्षा और सम्मान का दावा खोखला नजर आता है।
नेहा वर्मा का यह मामला दर्शाता है कि सरकारी विभागों में न केवल भ्रष्टाचार फैला हुआ है, बल्कि महिलाओं को खुलेआम दबाने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह उठता है कि जब एक सरकारी महिला कर्मचारी को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम महिलाओं की स्थिति कैसी होगी?
क्या होगी कार्रवाई?
यह मामला गंभीर है और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है। यदि भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देगा।
सरकार और संबंधित विभाग को इस मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर किसी महिला कर्मचारी को इस तरह परेशान न कर सके।
बलरामपुर के ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में फैले इस भ्रष्टाचार के खिलाफ यदि सरकार ने कठोर कदम नहीं उठाए, तो यह जनता के विश्वास को तोड़ने वाला होगा। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।











