KGBV भर्ती विवाद: 10% EWS कोटा क्यों हुआ गायब—अब जांच के घेरे में पूरा सिस्टम
2019 से लागू 10% EWS कोटा गायब—“सीटें कम” का तर्क नियमों के विपरीत, जांच के संकेत
📍 बिजनौर | TargetTvLive स्पेशल रिपोर्ट
✍️ अवनीश त्यागी
जनपद बिजनौर में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (KGBV) की भर्ती प्रक्रिया इन दिनों बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। भर्ती विज्ञापन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण का उल्लेख न होने से अभ्यर्थियों में आक्रोश है और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि जहां अन्य आरक्षण श्रेणियों—SC, ST, OBC—का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, वहीं EWS को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। जबकि वर्ष 2019 से लागू संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार सभी सरकारी भर्तियों में 10 प्रतिशत EWS आरक्षण अनिवार्य है।
भर्ती विज्ञापन पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि EWS आरक्षण “कुल पदों” (Total Vacancy) के आधार पर लागू होता है, न कि विषयवार सीटों के अनुसार। ऐसे में यदि किसी भर्ती में EWS का जिक्र ही नहीं किया गया, तो यह नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है।
उदाहरण के तौर पर यदि कुल पद 50 हैं, तो लगभग 5 पद EWS के लिए आरक्षित होने चाहिए, भले ही वे अलग-अलग विषयों में विभाजित क्यों न हों।
BSA के विरोधाभासी बयान से बढ़ा विवाद
इस मामले में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) सचिन कसाना से बातचीत की गई, तो उन्होंने पहले इसे पुराना विज्ञापन बताते हुए कहा कि उस समय EWS लागू नहीं था।
हालांकि, बाद में उन्होंने अलग तर्क देते हुए कहा—
👉 “किसी भी विषय में 8 से अधिक सीटें नहीं हैं, इसलिए आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता।”
उन्होंने यह भी कहा—
👉 “आंगनबाड़ी में भी EWS आरक्षण नहीं दिया जाता, यदि अधिक आपत्ति है तो अभ्यर्थी हाईकोर्ट जा सकते हैं।”
इन बयानों में विरोधाभास ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। साथ ही, बार-बार संपर्क के प्रयासों के बावजूद स्पष्ट जवाब न मिलना प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
क्या कहते हैं नियम?
आरक्षण से जुड़े जानकारों के अनुसार:
- EWS आरक्षण वर्ष 2019 में 103वें संविधान संशोधन के तहत लागू हुआ
- यह सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों के लिए 10% अतिरिक्त कोटा है
- इसे कुल पदों (Total Posts) पर लागू किया जाता है
- रोस्टर प्रणाली के तहत सभी श्रेणियों के पद तय होते हैं
👉 महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि विषयवार सीटें कम होने का आधार देकर EWS आरक्षण को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी रण विजय सिंह ने कहा—
👉 “पूरे प्रकरण की जानकारी ली जा रही है। यदि कोई अनियमितता पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
इस बयान के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो सकती है।
उठते बड़े सवाल
- क्या भर्ती में जानबूझकर EWS आरक्षण को दरकिनार किया गया?
- क्या नियमों की गलत व्याख्या कर अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन हुआ?
- क्या यह मामला न्यायालय की दहलीज तक पहुंचेगा?
बिजनौर की KGBV भर्ती अब सिर्फ नियुक्ति प्रक्रिया का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह आरक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है, तो न केवल भर्ती प्रक्रिया पर असर पड़ेगा, बल्कि यह मामला राज्य स्तर पर भी नीति और व्यवस्था में सुधार की मांग को तेज कर सकता है।
👉 फिलहाल, सभी की नजरें प्रशासनिक जांच और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं।












