साप्ताहिक बाजार में अनुरक्षण शुल्क वसूली में अनुबंध अनियमितताओं का आरोप

बिजनौर: अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद बिजनौर द्वारा साप्ताहिक बाजार में अनुरक्षण शुल्क वसूलने के लिए किए गए अनुबंध को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस संबंध में महायुक्त, सुरादाबाद मंडल को भेजे गए एक पत्र में अनुबंध प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, सरकारी राजस्व की हानि, तथा अनुचित शुल्क वसूली के आरोप लगाए गए हैं।
पत्र में कहा गया है कि अधिशासी अधिकारी द्वारा साप्ताहिक बाजार में अनुरक्षण शुल्क वसूलने के लिए “सांई स्वयं सहायता समूह” नामक संस्था से अनुबंध किया गया, लेकिन इसके गठन, उद्देश्य एवं संविधान के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि अनुबंध निजी आर्थिक लाभ को ध्यान में रखते हुए किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हुआ।
अनियमितताओं के प्रमुख बिंदु:
- अनुबंध की पारदर्शिता पर सवाल
- नगर पालिका परिषद द्वारा एक निजी समूह से अनुबंध किया गया, लेकिन इसके उद्देश्य, गठन एवं संचालन की कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
- अनुबंध किन शर्तों पर किया गया, इस पर भी स्पष्टता नहीं है।
- संस्था ने अनुबंध से किया इंकार
- “सांई स्वयं सहायता समूह” की अध्यक्ष अमला देवी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने साप्ताहिक बाजार से अनुरक्षण शुल्क वसूलने के लिए कोई अनुबंध नहीं किया है।
- यदि ऐसा है तो, शुल्क वसूली का अधिकार किसे दिया गया और किसके आदेश से यह कार्य किया जा रहा है?
- अवैध शुल्क वसूली का आरोप
- तय शुल्क ₹100 प्रति दुकान एवं ₹50 प्रति ठेले के स्थान पर अधिक वसूली की जा रही है।
- यह तय दरों के विपरीत है और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया गया है।
- सरकारी राजस्व को नुकसान
- साप्ताहिक बाजार में दुकानों की संख्या सीमित दिखाकर मिलीभगत से सरकारी राजस्व की हानि की जा रही है।
- अनुबंध प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी से सरकारी कोष में जाने वाले धन का दुरुपयोग हो रहा है।
- स्टाम्प विक्रय और अनुबंध में विसंगतियां
- अनुबंध 01 अप्रैल 2024 से प्रभावी बताया जा रहा है, लेकिन स्टाम्प की खरीद 03 मई 2024 को की गई, जो संदेहास्पद है।
- यह सवाल खड़ा करता है कि क्या अनुबंध को पूर्व-निर्धारित तरीके से तैयार किया गया था?
जांच की मांग और प्रशासन से जवाब तलब
पत्र में प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह एक बड़ा प्रशासनिक घोटाला साबित हो सकता है।
नगर पालिका परिषद एवं संबंधित अधिकारियों से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मामला तूल पकड़ सकता है। यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो इस तरह के मामलों पर रोक लग सकती है और सरकारी राजस्व की हानि को बचाया जा सकता है।












