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“साहब, मैं मरी नहीं हूं… जिंदा हूं, मुझे फिर से जिंदा कर दीजिए!”

“साहब, मैं मरी नहीं हूं… जिंदा हूं, मुझे फिर से जिंदा कर दीजिए!”

मृत दर्शायी नईमा खातून
सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ घोषित हुई महिला, 6 महीने से राशन के लिए भटक रहा परिवार
TargetTvLive विशेष रिपोर्ट | अवनीश त्यागी

बिजनौर। सरकारी सिस्टम की एक कथित बड़ी चूक ने एक गरीब महिला की जिंदगी को मुश्किलों से भर दिया है। हैरानी की बात यह है कि महिला पूरी तरह जीवित है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसे मृत घोषित कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि उसका राशन कार्ड निरस्त हो गया और पिछले छह महीनों से उसका परिवार सरकारी राशन से वंचित है।

साहब, मैं मरी नहीं हूं… आपके सामने खड़ी हूं। अगर मर गई होती तो आपके दफ्तर कैसे आती? मुझ पर इतनी दया कर दो कि मुझे फिर से जिंदा कर दो।

यह दर्दभरी गुहार बढ़ापुर कस्बे के मोहल्ला नौमी निवासी नईमा खातून की है, जो पिछले कई महीनों से अपने जीवित होने का सबूत लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं।

एक गलती ने छीन लिया गरीब परिवार का सहारा

नईमा खातून का आरोप है कि पूर्ति विभाग के रिकॉर्ड में उन्हें मृत दिखा दिया गया, जिसके कारण उनका राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया। उनका राशन कार्ड संख्या 1134130755 है, जिसमें छह यूनिट दर्ज हैं।

महिला का कहना है कि उनका परिवार बेहद गरीब है और पति वहीदुल्ला लंबे समय से बीमार रहते हैं। ऐसे में सरकारी राशन ही परिवार के लिए सबसे बड़ा सहारा था। लेकिन रिकॉर्ड में हुई इस कथित गलती ने उनके घर का चूल्हा तक प्रभावित कर दिया।

राशन लेने पहुंची तो मिला चौंकाने वाला जवाब

नईमा बताती हैं कि करीब छह महीने पहले जब वह राशन लेने पहुंचीं तो डीलर ने कहा कि उनका राशन कार्ड निरस्त हो चुका है क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है।

पहले तो उन्हें इस बात पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने जन सेवा केंद्र पर जाकर ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक कराया तो वहां भी उन्हें मृत दर्शाया गया मिला। इसके बाद उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

जिंदा होने का सबूत देती रही महिला, नहीं हुई सुनवाई

पीड़िता का कहना है कि वह कई बार पूर्ति विभाग और उपजिलाधिकारी कार्यालय पहुंच चुकी हैं। हर बार अधिकारियों को अपने जीवित होने के प्रमाण भी दिए, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।

महिला के मुताबिक, हर बार उन्हें सिर्फ जांच और कार्रवाई का आश्वासन मिलता है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो उनका नाम रिकॉर्ड में सही किया गया और न ही राशन कार्ड बहाल हुआ।

राशन बंद, परिवार पर संकट

छह महीने से राशन न मिलने के कारण परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। बीमार पति, घर की जिम्मेदारियां और बढ़ती महंगाई ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। परिवार का कहना है कि कई बार उन्हें उधार लेकर घर चलाना पड़ा है।

सिस्टम पर खड़े हुए बड़े सवाल

यह मामला सिर्फ एक महिला के राशन कार्ड का नहीं है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड और लाभार्थी सत्यापन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है। यदि कोई जीवित व्यक्ति सरकारी कागजों में मृत हो सकता है, तो ऐसी त्रुटियों का खामियाजा कितने अन्य लोगों को भुगतना पड़ रहा होगा?

अब प्रशासन की परीक्षा

नईमा खातून की मांग सिर्फ इतनी है कि उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में फिर से जीवित दर्ज किया जाए और उनका राशन कार्ड बहाल किया जाए, ताकि उनका परिवार सम्मान के साथ जीवन यापन कर सके।

अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर एक जिंदा महिला को “जिंदा” साबित करने की इस लड़ाई का अंत कब होगा।

TargetTvLive सवाल पूछता है…

जब एक महिला अपने जीवित होने का प्रमाण लेकर महीनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हो जाए, तो क्या इसे सिर्फ तकनीकी गलती कहा जा सकता है या यह व्यवस्था की संवेदनहीनता का उदाहरण है?

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
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