IGRS पर लापरवाही महंगी पड़ेगी! DM जसजीत कौर सख्त—EO नगीना-बिजनौर और तहसीलदार चांदपुर से जवाब तलब
✍️ अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर, 21 अप्रैल 2026। जन शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही अब अधिकारियों पर भारी पड़ सकती है। कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी जसजीत कौर ने IGRS पोर्टल पर शिकायतों के डिफॉल्टर पाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए नगर पालिका नगीना व बिजनौर के अधिशासी अधिकारियों (EO) और तहसीलदार चांदपुर से जवाब तलब करने के निर्देश दिए।
क्या है पूरा मामला?
IGRS (Integrated Grievance Redressal System) पोर्टल पर दर्ज जन शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई विभाग तय समय सीमा और गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए DM ने साफ संदेश दिया—अब लापरवाही नहीं चलेगी।
DM का सख्त रुख—“डिफॉल्टर बर्दाश्त नहीं”
बैठक में DM जसजीत कौर ने कहा कि:
- मुख्यमंत्री स्तर पर जन शिकायतों का निस्तारण सर्वोच्च प्राथमिकता है
- समय पर समाधान न करना शासनादेश का उल्लंघन है
- डिफॉल्टर अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि IGRS पोर्टल पर कोई भी संदर्भ डिफॉल्टर या असंतोषजनक स्थिति में पाया गया, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
रोजाना मॉनिटरिंग के निर्देश
DM ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए:
- प्रतिदिन IGRS पोर्टल का समीक्षा अवलोकन करें
- शिकायतों का गुणवत्तापरक और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें
- किसी भी स्थिति में शिकायत डिफॉल्टर न हो
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?
बैठक में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) शरद कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह, उपनिदेशक कृषि डॉ. घनश्याम सिंह सहित कई जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर विकास त्यागी ने IGRS पोर्टल की प्रक्रिया पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
विश्लेषण: सिस्टम सख्त, लेकिन क्या बदलेगा ग्राउंड रियलिटी?
IGRS पोर्टल पर सख्ती से यह साफ है कि सरकार डिजिटल गवर्नेंस के जरिए जवाबदेही तय करना चाहती है।
लेकिन सवाल यह है कि:
- क्या अधिकारी वास्तव में गुणवत्ता के साथ निस्तारण करेंगे या सिर्फ आंकड़े सुधारेंगे?
- क्या शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिलेगी?
अगर निगरानी लगातार और निष्पक्ष रही, तो यह कदम जनता के विश्वास को मजबूत कर सकता है। अन्यथा यह सिर्फ कागजी सुधार बनकर रह जाएगा।
DM जसजीत कौर का यह सख्त रुख साफ संकेत है कि अब जन शिकायतों में लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस की नीति लागू हो रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अधिकारी इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
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