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बिजनौर में हाईवोल्टेज तारों की घटनाएं: प्रशासन की लापरवाही या सिस्टम की विफलता ?

बिजनौर में हाईवोल्टेज तारों की घटनाएं: प्रशासन की लापरवाही या सिस्टम की विफलता ?

BIJNOR. हाल ही में बिजनौर जिले में हाईवोल्टेज तार टूटने की घटनाओं की एक श्रृंखला ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है। मात्र तीन दिन के भीतर, दो अलग-अलग स्थानों पर 11 हजार वोल्ट की लाइन टूटकर गिरने से एक युवती की दर्दनाक मौत हो गई और दूसरी घटना में एक बड़ा हादसा होते-होते बचा।

पहली घटना रामजीवाला छकड़ा की है, जहाँ पिता-पुत्री सड़क पर जा रहे थे और अचानक तार टूटकर बेटी के ऊपर गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद घटना से ग्रामीणों में आक्रोश फूट पड़ा, और उन्होंने सड़क जाम कर विरोध जताया। लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई के बजाय महज़ सांत्वना के शब्द ही सुनने को मिले।

इसके ठीक कुछ ही दिनों बाद, दयालवाला के मुख्य बाजार में एक बार फिर 11 हजार वोल्ट की लाइन टूटकर गिर गई। हालांकि इस बार कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन बाजार में मची अफरा-तफरी ने दिखा दिया कि लोगों की सुरक्षा किस हद तक खतरे में है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में इस तरह की घटनाएं न केवल जानलेवा हैं, बल्कि व्यापार और सामान्य जीवन को भी बाधित करती हैं।

प्रशासन और बिजली विभाग की ज़िम्मेदारी

ये घटनाएं केवल दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर लापरवाही का परिणाम हैं। हाईवोल्टेज लाइनों की नियमित जांच, मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी बिजली विभाग की है, लेकिन ऐसी घटनाओं से साफ है कि या तो यह काम ठीक से नहीं हो रहा, या इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। ग्रामीण इलाकों में पुराने और जर्जर तारों को बदलने की प्रक्रिया में देरी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।

ग्रामीणों का आक्रोश और समाधान की आवश्यकता

जब तक प्रशासन और बिजली विभाग अपनी ज़िम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। ग्रामीणों का सड़क जाम करना, प्रदर्शन करना — ये सभी कदम उनकी असुरक्षा और उपेक्षा की भावना को दर्शाते हैं। स्थानीय नेताओं और अधिकारियों को चाहिए कि वे इस मुद्दे को प्राथमिकता दें, सभी हाईवोल्टेज लाइनों का निरीक्षण करवाएं, और आवश्यक मरम्मत कार्य तुरंत शुरू करें।

बिजनौर की ये घटनाएं पूरे बिजली ढांचे की खामियों की ओर इशारा करती हैं। इन घटनाओं से सबक लेते हुए, प्रशासन को चाहिए कि वो न केवल दोषियों पर कार्रवाई करे, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक ठोस योजना बनाए। जनता की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता, और यदि बिजली विभाग अपनी नींद से नहीं जागा, तो न जाने कितनी और मासूम जिंदगियां इन लापरवाहियों की भेंट चढ़ जाएंगी।

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