बांदा में बालिका समृद्धि योजना घोटाला: पीड़ितों को कब मिलेगा न्याय?
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद में एक चौंकाने वाला भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसमें बाल विकास परियोजना विभाग द्वारा गरीब परिवारों की बच्चियों के लिए खरीदे गए बांड विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से गायब हो गए। 2005 में शुरू हुई केंद्र सरकार की बालिका समृद्धि योजना और बालिका श्री योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की बच्चियों के नाम पर ₹800 के बांड खरीदे गए थे। नियमानुसार, यह बांड बच्चियों के 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर भुनाए जाने थे, लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों ने डाक विभाग के अफसरों से सांठगांठ कर समय से पहले ही इन बांडों का भुगतान निकाल लिया और पूरा पैसा हड़प लिया।
शिकायत के बाद भी जांच अधर में
इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश तब हुआ जब पीड़ित परिवारों ने अपने हक का पैसा मांगना शुरू किया। 2023 में जब पूरे मामले की शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल से की गई, तो उन्होंने तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए। लेकिन आज तक न जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, न ही दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई हुई।
मामले को दबाने के लिए बाल विकास परियोजना विभाग ने एक बाबू को निलंबित कर दिया, लेकिन वह भी अब रिटायर हो चुका है। यानी, असल दोषी आज भी बचते फिर रहे हैं। भ्रष्टाचार का यह खुलासा होने के बाद भी प्रभावित बच्चियों को उनका हक वापस नहीं मिला, जो सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
महिला आयोग की दखल और पीड़ितों की गुहार
आज जब महिला आयोग की सदस्य अनुपमा सिंह लोधी बांदा पहुंचीं, तो पीड़ित बच्चियों और उनके माता-पिता ने उनसे मिलकर इस घोटाले की पूरी कहानी बताई और न्याय की गुहार लगाई। इस पर अनुपमा सिंह लोधी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को फौरन जांच करने और दोषियों पर कार्रवाई कर पीड़ितों को उनका पैसा लौटाने का निर्देश दिया।
बड़ा सवाल: क्या मिलेगा न्याय ?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? जिन योजनाओं का उद्देश्य गरीब बच्चियों को आर्थिक सुरक्षा देना था, वही योजनाएं भ्रष्टाचार का अड्डा बन गईं।
सरकार को चाहिए कि वह इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए और जिन बच्चियों का हक छीना गया, उन्हें न्याय दिलाए। साथ ही, इस तरह की योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में कोई अधिकारी गरीबों के अधिकारों पर डाका न डाल सके।











