अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉन्क्लेव: भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को वैश्विक पहचान देने की पहल

लखनऊ। भारतीय संस्कृति, धर्म और अध्यात्म को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉन्क्लेव का आयोजन 10 फरवरी, 2025 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया जा रहा है। इस भव्य आयोजन की अगुवाई पर्यटन विभाग, संस्कृति विभाग और अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान द्वारा की जा रही है।
रामायण: धर्म और संस्कृति का सेतु
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने इस आयोजन को भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को विश्वव्यापी स्तर पर स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि यह भारतीय जीवन-मूल्यों और आदर्शों का प्रतिबिंब भी है। यह कॉन्क्लेव भारतीय संस्कृति की महानता से लोगों को अवगत कराने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास करेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार
इस बार का आयोजन केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नेपाल और श्रीलंका सहित राम वन गमन पथ से जुड़े 11 स्थानों पर अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। यह न केवल भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करने का अवसर है, बल्कि इसे वैश्विक संदर्भ में स्थापित करने की रणनीति भी है।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ
इस कॉन्क्लेव में दिनभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें प्रमुख हैं:
- रामायण एवं वेद विज्ञान क्विज प्रतियोगिता (11:30-12:30)
- “विश्वव्यापी श्री राम” संवाद – सुप्रसिद्ध अभिनेता आशुतोष राणा के साथ (1:00-2:00)
- राम वन गमन पथ और वैश्विक रामलीला प्रदर्शनी (सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक)
विशेष आकर्षण – आशुतोष राणा अभिनीत महानाट्य “हमारे राम” (शाम 5:30 से)
जनभागीदारी और सांस्कृतिक पुनर्जागरण इस कार्यक्रम में आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्विज प्रतियोगिता और लेख एवं कविता लेखन जैसी गतिविधियाँ रखी गई हैं, जिनके माध्यम से विजेताओं को हमारे राम नाटक के लिए विशेष पास दिए जाएंगे। इच्छुक प्रतिभागी irvr पर अपनी प्रविष्टियाँ भेज सकते हैं।
विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण
इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव की अवधारणा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय सनातन परंपरा को विश्व मंच पर स्थापित करने की एक सशक्त रणनीति का हिस्सा भी है। यह आयोजन रामायण की कथाओं को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करने के साथ-साथ इसे वैश्विक संवाद का विषय भी बना रहा है।आशुतोष राणा जैसे प्रसिद्ध कलाकार के माध्यम से राम कथा का मंचन, युवाओं को राम के जीवन से प्रेरणा लेने और उनकी शिक्षाओं को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में भी इस आयोजन का विस्तार, भारतीय संस्कृति की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने का संकेत देता है।
अतः, यह कॉन्क्लेव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो भारतीय परंपराओं को आधुनिक संदर्भ में पुनः स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है।












