“20 हजार में मौत!” महादेवपुरम में झोलाछाप का खेल उजागर, जच्चा की मौत से मचा बवाल
रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive
बिजनौर | ग्राउंड रिपोर्ट
बिजनौर के महादेवपुरम कॉलोनी में एक बार फिर झोलाछाप चिकित्सा व्यवस्था की खौफनाक सच्चाई सामने आई है। यहां एक कथित महिला “डॉक्टर” द्वारा कराए गए प्रसव के दौरान शहजादपुर निवासी उषा की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को तबाह कर दिया, बल्कि पूरे इलाके में गुस्से की आग भड़का दी है।
“पहले 20 हजार दो, फिर इलाज”—गरीबी बनी मजबूरी
मृतका के पति जोगेंद्र के मुताबिक, बुधवार दोपहर करीब 1 बजे वह अपनी पत्नी उषा को प्रसव पीड़ा के चलते महादेवपुरम कॉलोनी में एक महिला के पास लेकर पहुंचे, जो घर पर ही डिलीवरी कराने का काम करती है।
- महिला ने भर्ती के नाम पर 20 हजार रुपये जमा कराए
- भरोसा दिलाया कि “सब ठीक हो जाएगा”
- थोड़ी ही देर में कहा गया कि “डिलीवरी करनी पड़ेगी”
गरीबी और भरोसे के बीच फंसे परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि यह फैसला उनकी जिंदगी बदल देगा।
बच्चा बचा… लेकिन मां हार गई जिंदगी की जंग
सूत्रों के अनुसार:
- प्रसव के दौरान बच्चे का जन्म सामान्य रूप से हो गया
- लेकिन इसके बाद उषा की हालत तेजी से बिगड़ने लगी
- प्रसव के बाद भारी रक्तस्राव (ब्लीडिंग) शुरू हो गया
- झोलाछाप महिला के पास न तो इलाज के साधन थे, न अनुभव
सबसे चौंकाने वाली बात—
👉 हालत गंभीर होने के बावजूद उषा को समय पर अस्पताल रेफर नहीं किया गया
और आखिरकार, अत्यधिक रक्तस्राव के चलते उषा ने दम तोड़ दिया।
मौत के बाद फूटा गुस्सा, मौके पर उमड़ी भीड़
जैसे ही उषा की मौत की खबर फैली, महादेवपुरम कॉलोनी में हड़कंप मच गया।
- परिजनों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जुट गई
- झोलाछाप महिला के खिलाफ जमकर आक्रोश फूटा
- लोगों ने सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए हंगामा किया
इलाके में देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
स्वास्थ्य विभाग की एंट्री, खुलने लगे राज
घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया:
- प्रसव कराने वाली महिला के पास कोई मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं
- क्लीनिक/घर पर चल रहा “मिनी अस्पताल” पूरी तरह अवैध
- इमरजेंसी से निपटने के लिए कोई उपकरण मौजूद नहीं
सूत्रों के अनुसार, क्लीनिक को सील करने और संचालक पर एफआईआर दर्ज करने की तैयारी चल रही है।
बड़ा सवाल: आखिर कब रुकेगा “नींद हकीम” का खेल?
बिजनौर और आसपास के इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल लगातार फैल रहा है।
कारण साफ हैं:
- सस्ता इलाज और तुरंत सुविधा का लालच
- सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित पहुंच
- प्रशासन की ढीली निगरानी
लेकिन हर बार इसकी कीमत किसी न किसी की जान से चुकानी पड़ती है।
परिजनों का दर्द: “अगर समय पर अस्पताल भेजते तो…”
मृतका के परिजनों ने फफकते हुए आरोप लगाया:
“20 हजार रुपये लेकर झूठा भरोसा दिया गया। हालत बिगड़ने पर भी अस्पताल नहीं भेजा गया। अगर सही समय पर इलाज मिलता, तो उषा आज हमारे बीच होती।”
आगे क्या होगी कार्रवाई?
सूत्रों के अनुसार:
- झोलाछाप महिला के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो सकता है
- जिलेभर में अवैध क्लीनिकों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा
- स्वास्थ्य विभाग पर भी जवाबदेही तय हो सकती है
निष्कर्ष: एक और मौत, सिस्टम फिर बेनकाब
महादेवपुरम की यह घटना सिर्फ एक लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की नाकामी का खुला सबूत है।
जब तक “नींद हकीम” पर सख्ती और स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती नहीं होगी, तब तक 20 हजार में ऐसे ही जिंदगियां बिकती और खत्म होती रहेंगी।
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