योग दिवस की बैठक में ‘योग’ नहीं, दिखी लापरवाही? कई स्कूल-कॉलेज रहे गायब, अब उठ रहे बड़े सवाल
राष्ट्रीय अभियान से दूरी या प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी? आखिर महत्वपूर्ण बैठक में क्यों नहीं पहुंचे कई शिक्षण संस्थान
विशेष खोजी रिपोर्ट | अवनीश त्यागी | TargetTVLive
बिजनौर। 21 जून को पूरी दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने जा रही है। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक योग को जन-जन तक पहुंचाने की अपील कर रहे हैं। सरकारी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि योग दिवस केवल एक दिन का आयोजन न होकर एक जनआंदोलन का रूप ले।
लेकिन बिजनौर में योग दिवस की तैयारियों को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब शिक्षा विभाग और संबंधित संस्थानों दोनों को देना पड़ सकता है।
योग सप्ताह और योग दिवस की तैयारियों के लिए बुलाई गई बैठक में जहां अनेक विद्यालय और महाविद्यालय मौजूद रहे, वहीं कई व्यक्तिगत संस्थान अनुपस्थित पाए गए। अब प्रशासन ने स्पष्टीकरण मांग लिया है, लेकिन सवाल यह है कि जब राष्ट्रीय स्तर के अभियान की तैयारी चल रही थी, तब कुछ शिक्षण संस्थानों ने इसे कितना गंभीरता से लिया?
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योग दिवस की तैयारी या सिर्फ सरकारी खानापूर्ति?
हर साल योग दिवस से पहले बैठकों, निर्देशों और कार्यक्रमों की लंबी सूची जारी होती है। तस्वीरें खिंचती हैं, रिपोर्टें बनती हैं और फाइलें भर जाती हैं।
लेकिन असली सवाल यह है कि क्या योग वास्तव में छात्रों तक पहुंच रहा है या फिर पूरा अभियान केवल कागजों और सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित होता जा रहा है?
बिजनौर की इस बैठक ने इसी बहस को फिर से जीवित कर दिया है।
जब योग दिवस की सफलता का आधार विद्यालय और महाविद्यालय हैं, तो उन्हीं संस्थानों का बैठक से अनुपस्थित रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
आखिर क्यों नहीं पहुंचे जिम्मेदार लोग?
यह सबसे बड़ा प्रश्न है।
क्या संबंधित संस्थानों को बैठक की सूचना समय पर नहीं मिली?
क्या सूचना मिलने के बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया गया?
क्या किसी अन्य कार्यक्रम के कारण प्रतिनिधि नहीं पहुंच सके?
या फिर योग दिवस को लेकर संस्थानों में अपेक्षित उत्साह ही नहीं है?
इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं। यही कारण है कि प्रशासन ने संबंधित संस्थानों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्णय लिया है।
जब सरकार योग को मिशन बना रही है, तब लापरवाही क्यों?
योग अब केवल शारीरिक व्यायाम नहीं रह गया है।
आज इसे तनाव, अवसाद, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी समस्याओं से बचाव का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। भारत सरकार वर्षों से योग को देश की सांस्कृतिक शक्ति और स्वास्थ्य अभियान के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
ऐसे में यदि शिक्षण संस्थान ही इस अभियान के प्रति उदासीन दिखाई दें तो यह चिंता का विषय बन जाता है।
क्योंकि स्कूल और कॉलेज ही वह जगह हैं जहां से योग की आदत नई पीढ़ी तक पहुंच सकती है।
क्या कागजों में पूरी हो जाएगी जिम्मेदारी?
TargetTVLive की पड़ताल में एक और महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है।
अक्सर सरकारी अभियानों में निर्देश तो जारी हो जाते हैं, लेकिन उनके अनुपालन की वास्तविक निगरानी कमजोर पड़ जाती है।
कई बार कार्यक्रमों की तस्वीरें भेज दी जाती हैं, उपस्थिति रजिस्टर भर दिए जाते हैं और रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर गतिविधियां अपेक्षित रूप से नहीं होतीं।
अब प्रशासन के सामने चुनौती केवल कार्यक्रम कराने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि योग सप्ताह वास्तव में विद्यालयों में आयोजित हो रहा है या नहीं।
छात्रों के स्वास्थ्य से जुड़ा है मामला
आज अधिकांश बच्चे और युवा मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया की दुनिया में अधिक समय बिता रहे हैं।
शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हैं।
मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि युवाओं की जीवनशैली में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
ऐसे समय में योग दिवस महज एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि समाज को स्वस्थ बनाने का प्रयास है।
प्रशासन की सख्ती के बाद क्या बदलेंगे हालात?
बैठक में अनुपस्थित संस्थानों से जवाब तलब किए जाने के बाद अब निगाहें अगले कदम पर टिकी हैं।
क्या केवल स्पष्टीकरण लेकर मामला समाप्त हो जाएगा?
या फिर प्रशासन यह भी जांच करेगा कि संबंधित संस्थानों में योग सप्ताह के कार्यक्रम वास्तव में आयोजित हो रहे हैं या नहीं?
यदि निगरानी मजबूत रही तो यह अभियान सफल हो सकता है।
लेकिन यदि सब कुछ कागजों तक सीमित रहा तो फिर वही पुराना सवाल खड़ा होगा—क्या सरकारी अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
TargetTVLive विश्लेषण
योग दिवस को सफल बनाने के लिए केवल सरकारी आदेश पर्याप्त नहीं हैं।
जरूरत है वास्तविक भागीदारी की।
जरूरत है जवाबदेही की।
जरूरत है यह देखने की कि जिन संस्थानों को भविष्य की पीढ़ी तैयार करनी है, वे स्वयं राष्ट्रीय अभियानों के प्रति कितने गंभीर हैं।
बिजनौर की यह बैठक एक साधारण प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही की परीक्षा भी है।
अब 21 जून को होने वाला आयोजन बताएगा कि योग दिवस वास्तव में जनआंदोलन बन पाया या फिर यह भी फाइलों, बैठकों और औपचारिक रिपोर्टों तक सीमित रह गया।
#TargetTVLive के सवाल
🔹 योग दिवस की महत्वपूर्ण बैठक से कई संस्थान अनुपस्थित क्यों रहे?
🔹 क्या सभी स्कूलों और कॉलेजों में योग सप्ताह के कार्यक्रम वास्तव में आयोजित होंगे?
🔹 क्या प्रशासन जमीनी स्तर पर सत्यापन करेगा?
🔹 क्या राष्ट्रीय अभियानों को लेकर शिक्षण संस्थानों की जवाबदेही तय होगी?
🔹 क्या योग दिवस सिर्फ फोटो और रिपोर्ट तक सीमित रहेगा या छात्रों के जीवन में बदलाव भी लाएगा?
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