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EXCLUSIVE: आरक्षित जंगल के पास चल रही आरा मशीनें, 10KM नियम हुआ फेल!

बिजनौर में ‘वन घोटाले’ का बड़ा खुलासा! 3KM पर चल रहीं आरा मशीनें, 10KM नियम की खुली धज्जियां

चांदपुर रोड और सिरधनी रोड पर संचालित मशीनों ने बढ़ाई हलचल, रामपुर ठकरा आरक्षित वन क्षेत्र के पास लाइसेंस जारी होने पर सवाल
विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट : अवनीश त्यागी 

बिजनौर: जनपद में वन विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरक्षित वन क्षेत्र रामपुर ठकरा के आसपास संचालित आरा मशीनों का मामला अब एक संभावित बड़े घोटाले का रूप लेता दिख रहा है। ताजा जांच में सामने आया है कि जिन आरा मशीनों को लाइसेंस जारी किया गया है, वे नियमों के खिलाफ बेहद कम दूरी पर संचालित हो रही हैं।

📍 कहां-कहां चल रहीं हैं आरा मशीनें?

मामले के अनुसार:

  • खालिद तालिब,आसिफ की आरा मशीने चांदपुर रोड पर स्थित है
  • शर्मा और इकबाल गजनफर की दूसरी आरा मशीने सिरधनी रोड पर संचालित है

दोनों स्थान आरक्षित वन क्षेत्र के बेहद करीब बताए जा रहे हैं।

नियम बनाम जमीनी हकीकत

वन विभाग के नियमानुसार:
➡️ किसी भी आरा मशीन को आरक्षित वन क्षेत्र से कम से कम 10 किलोमीटर दूर होना चाहिए

लेकिन वास्तविकता यह है कि:
➡️ इन आरा मशीनों की दूरी रामपुर ठकरा आरक्षित वन क्षेत्र से मात्र 3 किलोमीटर (एयर डिस्टेंस) है

👉 यह सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है।

GPS जांच में बड़ा खुलासा

स्थानीय स्तर पर की गई जांच में यह सामने आया कि:

  • दूरी मापने में जहानाबाद क्षेत्र को आधार बनाया गया
  • जबकि निकटतम आरक्षित वन क्षेत्र रामपुर ठकरा की दूरी को नजरअंदाज किया गया

👉 इससे साफ संकेत मिलते हैं कि दूरी मापने में संभावित हेरफेर किया गया।

लाइसेंस जारी करने पर उठे गंभीर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि:

  • जब नियमों के अनुसार दूरी पूरी नहीं थी, तो लाइसेंस कैसे जारी हुए?
  • क्या अधिकारियों ने जानबूझकर नियमों को नजरअंदाज किया?
  • क्या इसमें निजी लाभ और प्रभाव की भूमिका रही?

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

पर्यावरण पर संभावित खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि आरक्षित वन क्षेत्र के इतने पास आरा मशीनों का संचालन:

  • अवैध लकड़ी कटान को बढ़ावा दे सकता है
  • वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचा सकता है
  • पूरे क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ सकता है

स्थानीय लोगों में आक्रोश

इस मामले के सामने आने के बाद:

  • स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है
  • पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है

👉 लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं हुई, तो वन संरक्षण कानून केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे।

क्या होनी चाहिए कार्रवाई?

जनता और विशेषज्ञों की प्रमुख मांगें:

  • पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच
  • नियमों के खिलाफ जारी लाइसेंस की तत्काल निरस्तीकरण
  • दोषी अधिकारियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई

निष्कर्ष

बिजनौर में चांदपुर रोड और सिरधनी रोड पर संचालित आरा मशीनों का यह मामला केवल नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

अगर समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला एक बड़े वन और पर्यावरणीय घोटाले के रूप में सामने आ सकता है।

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