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“38 शिकायतें… सिर्फ 2 का समाधान!” चांदपुर में खुली सिस्टम की सच्चाई, अफसरों को फटकार

“38 में सिर्फ 2 शिकायतों का निस्तारण!” चांदपुर समाधान दिवस में सिस्टम पर उठे सवाल, अफसरों को सख्त चेतावनी

📍बिजनौर | 04 अप्रैल 2026
✍️ विशेष रिपोर्ट: अवनीश त्यागी | TargetTvLive

जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान देने के उद्देश्य से आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस एक बार फिर अपने परिणामों को लेकर चर्चा में है। तहसील चांदपुर के डबाकरा हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में 38 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन मौके पर मात्र 2 शिकायतों का ही निस्तारण हो सका। ऐसे में “तुरंत समाधान” के दावे पर सवाल उठना लाजमी है।

समाधान दिवस: मकसद बनाम हकीकत

जिलाधिकारी के निर्देशों के तहत आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह ने की। उद्देश्य स्पष्ट था—जनता को एक ही मंच पर उनकी समस्याओं का समाधान उपलब्ध कराना, ताकि उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

हालांकि, मौके पर बड़ी संख्या में शिकायतों का लंबित रह जाना इस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

आंकड़े जो कहानी बयां कर रहे हैं

  • कुल शिकायतें: 38
  • मौके पर निस्तारण: 02
  • लंबित/संदर्भित: 36

यानी करीब 95% शिकायतें मौके पर हल नहीं हो सकीं, जो सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती हैं।

सीडीओ के सख्त निर्देश

मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि—

  • शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए
  • अधिकतम शिकायतों का समाधान मौके पर ही किया जाए
  • शेष मामलों का एक सप्ताह के भीतर निस्तारण अनिवार्य हो
  • हर शिकायत में शिकायतकर्ता की संतुष्टि भी दर्ज की जाए

उन्होंने दो टूक कहा कि लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी

विश्लेषण: कहां अटक रहा सिस्टम?

TargetTvLive की पड़ताल में सामने आया कि—

  • विभागों के बीच समन्वय की कमी
  • मौके पर निर्णय लेने के सीमित अधिकार
  • जटिल मामलों का बढ़ता दबाव
  • अधिकारियों की पूर्व तैयारी का अभाव

ये सभी कारण मिलकर समाधान दिवस के उद्देश्य को कमजोर कर रहे हैं।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारी

इस दौरान उप जिलाधिकारी नितिन तेवतिया, परियोजना निदेशक दिनकर भारती, उपायुक्त मनरेगा, तहसीलदार सहित कई विभागीय अधिकारी मौजूद रहे और शिकायतों को सुनकर आवश्यक निर्देश दिए।

जनता की आवाज

स्थानीय लोगों का कहना है कि—

  • समाधान दिवस को सिर्फ औपचारिकता नहीं, वास्तविक समाधान मंच बनाया जाए
  • मौके पर अधिकतम शिकायतों का निस्तारण हो
  • लंबित मामलों की कड़ी मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय हो

निष्कर्ष: सुधार की दरकार

चांदपुर का यह समाधान दिवस साफ संकेत देता है कि प्रशासन की मंशा भले ही स्पष्ट हो, लेकिन जमीनी क्रियान्वयन में अभी भी सुधार की जरूरत है। यदि प्रशासन इस गैप को पाटने में सफल होता है, तभी “संपूर्ण समाधान” की परिकल्पना धरातल पर साकार हो पाएगी।

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