“₹2.85 लाख करोड़ खर्च ही नहीं हुआ!”—यूपी बजट पर बड़ा खुलासा, आखिरी दिन ₹1 लाख करोड़ के बिल पास कर बचाने की कोशिश?
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लखनऊ से सामने आए वित्तीय वर्ष 2025-26 के चौंकाने वाले आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य सरकार के कुल ₹8.65 लाख करोड़ के बजट में से करीब ₹2.85 लाख करोड़ राशि बिना खर्च किए ही वापस हो गई, जबकि केवल लगभग ₹5.79 लाख करोड़ का ही उपयोग हो सका।
ये आंकड़े सरकारी वित्तीय प्रबंधन प्रणाली कोषवाणी पोर्टल के जरिए सामने आए हैं, जो दर्शाते हैं कि बजट आवंटन और वास्तविक खर्च के बीच भारी अंतर बना हुआ है।
क्या कहते हैं आंकड़े? (Deep Breakdown)
- कुल बजट: ₹8.65 लाख करोड़
- वास्तविक खर्च: ₹5.79 लाख करोड़
- बिना खर्च वापस: ₹2.85 लाख करोड़
- अंतिम दिन पास हुए बिल: ₹1 लाख करोड़
👉 यह संकेत देता है कि कई विभाग पूरे साल खर्च नहीं कर पाए और वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन “जल्दबाजी” में बिल पास कर फंड उपयोग दिखाने की कोशिश की गई।
कौन-कौन से विभाग पीछे रह गए?
सबसे ज्यादा बजट लौटाने वाले विभाग:
- वित्त विभाग (ऋण सेवा व अन्य व्यय): ₹1.23 लाख करोड़ वापस
- पेंशन व भत्ते: ₹28,894 करोड़ वापस
- प्राथमिक शिक्षा विभाग: ₹21,266 करोड़ वापस
- समाज कल्याण विभाग: ₹15,182 करोड़ वापस
👉 ये वही विभाग हैं जिनका सीधा असर आम जनता—बुजुर्गों, छात्रों और गरीब वर्ग—पर पड़ता है।
किसने किया बेहतर प्रदर्शन?
सक्रिय और खर्च में आगे रहने वाले विभाग:
- गृह विभाग: ₹33,551 करोड़ खर्च
- ऊर्जा विभाग: ₹49,312 करोड़ खर्च
रिकॉर्ड बनाने वाला विभाग: PWD
- कुल बजट: ₹36,293 करोड़
- खर्च: ₹30,581 करोड़ (लगभग 86%)
- अब तक का सबसे बड़ा बजट उपयोग
👉 उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने खर्च के मामले में रिकॉर्ड बनाकर अन्य विभागों के लिए उदाहरण पेश किया है।
विश्लेषण: आखिर क्यों नहीं खर्च हो पाया इतना बड़ा बजट?
1. प्रोजेक्ट्स में देरी और मंजूरी की धीमी प्रक्रिया
कई योजनाएं कागजों में ही अटकी रहीं, जिससे समय पर फंड उपयोग नहीं हो पाया।
2. ग्राउंड लेवल पर क्रियान्वयन की कमजोरी
स्थानीय स्तर पर निगरानी और कार्यान्वयन में कमी दिखी।
3. वित्तीय वर्ष के अंत में जल्दबाजी
आखिरी दिन ₹1 लाख करोड़ के बिल पास होना “March Rush” का स्पष्ट संकेत है—जो पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
4. योजना निर्माण और बजट आवंटन में असंतुलन
कई विभागों को जरूरत से ज्यादा बजट मिला, जिसे वे खर्च ही नहीं कर पाए।
जनता पर क्या असर?
- ❌ विकास कार्य अधूरे रह सकते हैं
- ❌ शिक्षा, पेंशन और कल्याण योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचा
- ❌ आर्थिक विकास की रफ्तार प्रभावित
👉 सीधा असर आम नागरिकों की जिंदगी और राज्य की विकास दर पर पड़ता है।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार:
“बजट का वापस जाना सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक अक्षमता का संकेत है। अगर समय पर खर्च नहीं हुआ तो विकास की गति रुक जाती है।”
निष्कर्ष: सिस्टम में सुधार की जरूरत
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इतने बड़े पैमाने पर बजट का वापस जाना यह दर्शाता है कि
👉 फाइनेंशियल प्लानिंग, मॉनिटरिंग और एक्जीक्यूशन में बड़े सुधार की जरूरत है।
Target TV Live की अपील
सरकार को चाहिए कि:
- ✔️ विभागवार खर्च की नियमित समीक्षा हो
- ✔️ अंतिम समय की “March Rush” पर रोक लगे
- ✔️ योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए











