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Bijnor Leopard Alert: शेरकोट के भनौटी गांव में घायल गुलदार मिलने से दहशत, जांच में जुटा वन विभाग

Bijnor Leopard Alert: शेरकोट के भनौटी गांव में घायल गुलदार मिलने से दहशत, जांच में जुटा वन विभाग

 

📍 स्थान: बिजनौर
📍 क्षेत्र: शेरकोट थाना क्षेत्र, ग्राम भनौटी

घटना का संक्षिप्त विवरण

बिजनौर जिले के शेरकोट क्षेत्र के ग्राम भनौटी में उस समय हड़कंप मच गया जब सड़क किनारे एक घायल गुलदार (तेंदुआ) पड़ा मिला। राहगीरों और ग्रामीणों ने जब जंगली जानवर को देखा तो तुरंत गांव में खबर फैल गई और मौके पर भारी भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हो गई और घायल गुलदार को कब्जे में लेकर उपचार व जांच की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार गुलदार के शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे थे, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वह किसी दूसरे जंगली जानवर से संघर्ष में घायल हुआ हो सकता है।

हाल ही में शेरकोट क्षेत्र के आसपास भी सड़क किनारे गुलदार मिलने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वन विभाग की सतर्कता बढ़ गई है।

📍 मौके पर क्या हुआ – ग्रामीणों की भीड़, दहशत का माहौल

घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से लोग मौके पर पहुंच गए। कई ग्रामीणों ने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

  • ग्रामीणों ने बताया कि गुलदार कुछ समय तक जख्मी हालत में सड़क किनारे पड़ा रहा
  • आसपास के खेतों और गन्ने के खेतों में तलाश की गई
  • वन विभाग के आने तक ग्रामीणों ने दूरी बनाकर रखी

वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों से गुलदार के पास न जाने की अपील की है क्योंकि घायल जंगली जानवर कभी भी आक्रामक हो सकता है।

क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं? (विश्लेषण)

विशेषज्ञों के अनुसार बिजनौर और आसपास के क्षेत्रों में गुलदार की मौजूदगी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है।

  • वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बिजनौर वन प्रभाग में लगभग 287 गुलदार होने का अनुमान है।
  • घने गन्ने के खेत गुलदार के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं।
  • जंगलों के सिकुड़ने और शिकार की कमी के कारण गुलदार गांवों और खेतों की ओर आने लगे हैं

इसी कारण जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और कई बार ग्रामीण भी खतरे में पड़ जाते हैं।

संभावित कारण: आपसी संघर्ष या शिकार की तलाश

वन विभाग के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार गुलदार के घायल होने के पीछे कई संभावनाएं हो सकती हैं:

1️⃣ दो गुलदारों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष
2️⃣ जंगली सूअर या अन्य बड़े जानवर से भिड़ंत
3️⃣ ऊंचाई से गिरने या बिजली लाइन से टकराने की संभावना
4️⃣ सड़क दुर्घटना

इन सभी पहलुओं की जांच के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।

वन विभाग की कार्रवाई

वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

संभावित कार्रवाई:

  • घायल गुलदार को रेस्क्यू कर उपचार
  • मेडिकल जांच व पोस्टमार्टम (यदि आवश्यकता)
  • आसपास के जंगल और खेतों में कॉम्बिंग
  • क्षेत्र में निगरानी बढ़ाना

वन अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि गुलदार दिखने पर तुरंत सूचना दें और खुद पकड़ने या भगाने की कोशिश न करें।

ग्रामीणों के लिए एडवाइजरी

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में लोगों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:

✔ सुबह-शाम खेतों में अकेले न जाएं
✔ बच्चों को खेतों के पास अकेले न भेजें
✔ समूह में खेतों पर काम करें
✔ गुलदार दिखे तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें

बड़ा सवाल

लगातार सामने आ रही घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है —

क्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ती गुलदार आबादी और गन्ने की खेती मानव-वन्यजीव संघर्ष को और बढ़ा रही है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वन प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

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