बिजनौर में 9 महीने से चल रहा अंडरपास आंदोलन हटाया, किसानों का आरोप— “बैनर कुचले, मुकदमे ठोके, अब होगा बड़ा आंदोलन”
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बिजनौर | डिजिटल डेस्क के लिए अवनीश त्यागी
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मेरठ-पौड़ी हाईवे स्थित बैराज के पास हेमराज कॉलोनी चौराहे पर पिछले 9 महीनों से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा अंडरपास आंदोलन अब नए विवाद में बदल गया है। भारतीय किसान संघ ने जिला प्रशासन और एनएचएआई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री को ज्ञापन भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
किसान संगठन ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने आंदोलन को “अमानवीय तरीके से कुचल दिया”, बैनर-झंडे मिट्टी में दबा दिए और ग्रामीणों पर मुकदमे दर्ज कर दिए।
क्या है पूरा मामला?
भारतीय किसान संघ जिला बिजनौर के अनुसार, मेरठ-पौड़ी हाईवे पर स्थित हेमराज कॉलोनी चौराहे पर अंडरपास की मांग को लेकर ग्रामीण और किसान पिछले 9 महीनों से धरने पर बैठे थे।
ग्रामीणों का कहना है कि:
- हाईवे पार करते समय लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं
- अंडरपास बनने से हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन मिलेगा
- कई बार अधिकारियों से आश्वासन मिला, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ
इसलिए ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण धरना शुरू किया था।
किसानों का बड़ा आरोप— “प्रशासन ने बलपूर्वक हटाया धरना”
ज्ञापन में किसान संघ ने आरोप लगाया कि:
- जिला प्रशासन और एनएचएआई अधिकारियों ने धरना जबरन हटाया
- आंदोलन स्थल पर लगे बैनर और झंडे मिट्टी में दबा दिए गए
- कई थानों की पुलिस तैनात कर ग्रामीणों को घरों में नजरबंद किया गया
- ग्रामीणों, महिलाओं और किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए
किसान संघ ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन और निंदनीय कार्रवाई बताया है।
मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री से की गई ये बड़ी मांगें
भारतीय किसान संघ ने ज्ञापन में सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
✔️ दोषी जिला प्रशासन और एनएचएआई अधिकारियों को तुरंत हटाया जाए
✔️ ग्रामीणों और किसानों पर दर्ज मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं
✔️ हेमराज कॉलोनी चौराहे पर अंडरपास निर्माण की मांग पूरी की जाए
चेतावनी— “मांगें नहीं मानी गईं तो होगा बड़ा आंदोलन”
भारतीय किसान संघ ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो:
👉 बिजनौर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा
👉 इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी
इस चेतावनी के बाद प्रशासन और सरकार पर दबाव बढ़ गया है।
विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है यह आंदोलन?
1. सुरक्षा से जुड़ा है मुद्दा
अंडरपास की मांग सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा से जुड़ी है। ग्रामीणों के अनुसार, दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
2. 9 महीने लंबा आंदोलन, फिर भी समाधान नहीं
इतने लंबे समय तक आंदोलन चलने के बावजूद समाधान न होना प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
3. किसान संगठनों की सक्रियता बढ़ी
भारतीय किसान संघ जैसे बड़े संगठन की एंट्री से आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है।
4. राजनीतिक असर भी संभव
ग्रामीण और किसान मुद्दों पर आंदोलन अक्सर राजनीतिक रूप ले लेते हैं।
ग्राउंड रियलिटी: क्या बन सकता है बड़ा विवाद?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- अगर प्रशासन और सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला
- तो यह आंदोलन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ा किसान आंदोलन बन सकता है
अब सबकी नजर सरकार के फैसले पर
ज्ञापन भेजे जाने के बाद अब देखना होगा कि:
- क्या प्रशासन मुकदमे वापस लेता है?
- क्या अंडरपास निर्माण की मंजूरी मिलती है?
- या आंदोलन और तेज होगा?
निष्कर्ष
बिजनौर का यह मामला सिर्फ एक अंडरपास का नहीं, बल्कि ग्रामीणों के अधिकार, सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में यह आंदोलन प्रदेश की बड़ी खबर बन सकता है।











