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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बिजनौर में महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बिजनौर में महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल

बिजनौर : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के शुभ अवसर पर बिजनौर के नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण का अद्भुत नजारा देखने को मिला। जिला प्रशासन और खेल विभाग के संयुक्त प्रयासों से आयोजित महिला रैली और मैराथन दौड़ ने न केवल महिलाओं की सहभागिता को प्रोत्साहित किया, बल्कि खेल के माध्यम से उनके उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।

रैली की शुरुआत नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम के गेट से हुई, जो नुमाइश ग्राउंड और विकास भवन होते हुए वापस स्टेडियम पहुंची। इसके बाद 3 किलोमीटर की महिला मैराथन दौड़ का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ चित्रा चौहान और अंशु चौधरी ने संयुक्त रूप से किया। दौड़ में ऐकता (पुत्री श्री सतीश कुमार) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, वहीं तनु, बबली और निक्की रानी ने क्रमशः द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ स्थान पर अपनी जगह बनाई। विजेताओं को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे महिलाओं के भीतर खेल के प्रति उत्साह और बढ़ा।

खेल के माध्यम से सशक्तिकरण की ओर कदम:
जिला क्रीड़ा अधिकारी राजकुमार ने इस अवसर पर कहा, “महिलाएं देश का सम्मान हैं। खेल के जरिए वे न केवल अपना करियर बना सकती हैं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम भी रोशन कर सकती हैं।” यह बयान महिलाओं की खेल में बढ़ती भूमिका को बल देता है, जो परंपरागत सोच से परे जाकर नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।

सामुदायिक भागीदारी और सहयोग:
इस आयोजन की सफलता में जिला खेल कार्यालय के हिमांशु, जितेंद्र कुमार, विशाल कुमार, आदित्य सिंह, मोहित जाटव और कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। इनकी उपस्थिति से आयोजन को एक व्यापक सामाजिक समर्थन मिला, जो यह दर्शाता है कि महिला सशक्तिकरण केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामूहिक प्रयास से जमीनी स्तर पर हकीकत बन सकता है।

महिला सशक्तिकरण की नई उम्मीद:
यह आयोजन न केवल खेल को बढ़ावा देने का जरिया बना, बल्कि महिलाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने और आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी। महिलाओं की इस बढ़ती भागीदारी से स्पष्ट है कि वे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने के लिए तत्पर हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल खेल भावना को जीवंत किया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि महिलाएं हर चुनौती को पार कर सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं।

इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि अगर महिलाओं को सही मंच और प्रोत्साहन मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन कर सकती हैं। बिजनौर की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मिसाल बन सकती है।

महिलाओं के अदम्य साहस और संघर्ष को सलाम!

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