तेंदुए की तलाश में वन विभाग की नई रणनीति: केमिकल ट्रैकिंग से तेज की पकड़ने की कोशिश

रिपोर्ट: अवनीश त्यागी/संतोष कुमार दुबे
बलरामपुर। सोहेलवा जंगल से सटे धामाचौरी गांव में तेंदुए की दहशत कम होने का नाम नहीं ले रही है। लगातार गश्त, पिंजरा और बकरी का चारा लगाने के बावजूद तेंदुआ पकड़ में नहीं आ रहा। अब वन विभाग ने तेंदुए की मौजूदगी का पता लगाने के लिए एक विशेष केमिकल ट्रैकिंग तकनीक अपनाई है। इस तकनीक से तेंदुए की गतिविधियों, उसके मूवमेंट के रास्तों और ठिकानों की पहचान की जा रही है, जिससे उसे जल्दी और सुरक्षित तरीके से पकड़ा जा सके।
कैसे काम करता है केमिकल ट्रैकिंग सिस्टम?
वन अधिकारियों के मुताबिक, तेंदुए की लोकेशन और उसकी मूवमेंट ट्रैक करने के लिए एक फेरोमोन-बेस्ड केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह केमिकल तेंदुए की स्वाभाविक गंध के साथ प्रतिक्रिया करता है। इसे तेंदुए की आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पगडंडियों, झाड़ियों और पानी के स्रोतों के पास छिड़का जाता है। तेंदुआ जब इन रास्तों से गुजरता है, तो उसके शरीर की गंध और केमिकल के संपर्क में आने से एक सुगंध-प्रतिक्रिया (scent reaction) होती है, जिससे टीम को उसकी हालिया मौजूदगी का पता चल जाता है।
इसके अलावा, यह केमिकल तेंदुए को अपनी तरफ आकर्षित भी कर सकता है, जिससे वह पिंजरे की ओर खिंच सकता है। यह तरीका आमतौर पर मांसाहारी वन्यजीवों की निगरानी में इस्तेमाल किया जाता है, खासकर उन इलाकों में जहां घना जंगल या ऊबड़-खाबड़ इलाका होता है।
केमिकल के इस्तेमाल से बढ़ी उम्मीदें
उप प्रभागीय वनाधिकारी एमबी सिंह ने बताया कि तेंदुए के बार-बार बच निकलने के बाद केमिकल ट्रैकिंग को एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में अपनाया गया है। “हमने तेंदुए के संभावित रास्तों और उसकी छिपने की जगहों पर केमिकल का छिड़काव किया है। अगर तेंदुआ इन रास्तों से गुजरेगा, तो केमिकल की प्रतिक्रिया से हमें संकेत मिलेंगे, जिससे हम उसकी सटीक लोकेशन का अंदाजा लगा सकेंगे,” उन्होंने कहा।
वन विभाग की टीम ने पहाड़ी नाले, गन्ने के खेत और आसपास के घने झाड़ियों वाले इलाकों में केमिकल मार्कर लगाए हैं। टीम नियमित रूप से इन इलाकों की निगरानी कर रही है, ताकि किसी भी हलचल या गंध प्रतिक्रिया को रिकॉर्ड किया जा सके।
ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह
गांव के निवासी राजबहादुर यादव, सूरज, राघव राम और सूर्य नरायन ने बताया कि गनेशपुर के महेंद्र कुमार शुक्ल और प्रदीप कुमार शुक्ल पर हुए हमले के बाद से लोगों में डर बना हुआ है। तेंदुए के खौफ से ग्रामीणों ने खेतों में जाना छोड़ दिया है, और शाम ढलने के बाद घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया है। वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से जंगल या गन्ने के खेतों की ओर न जाने की अपील की है।
जल्द पकड़ा जाएगा तेंदुआ
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि केमिकल ट्रैकिंग तकनीक से तेंदुए की गतिविधियों को जल्द ही ट्रेस किया जा सकेगा। जैसे ही उसकी सही लोकेशन का पता चलेगा, टीम उसे घेरकर पिंजरे में कैद कर लेगी और उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाएगा। ग्रामीणों को भी उम्मीद है कि वन विभाग की इस नई तकनीक से तेंदुए का आतंक जल्द खत्म होगा और गांव में एक बार फिर सामान्य जीवन बहाल होगा।











