गौ संरक्षण पर DM की सख्ती: गौशालाओं में सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

बिजनौर। जिले में गौ संरक्षण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने खंड विकास अधिकारियों और पशु चिकित्सा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि गौ आश्रय स्थलों के निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए और वहां पर गोवंश के स्वास्थ्य व भरण-पोषण की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सभी गौशालाओं में गोवंशों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हो और बीमार पशुओं के उपचार की समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही, हरे चारे, भूसे, दाने और शुद्ध पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि जिले में उपलब्ध चारागाह और खलिहान भूमि को चिन्हित कर वहां नेपियर घास या अन्य हरे चारे की खेती कराई जाए ताकि गौवंशों के आहार की कोई कमी न हो। जिन गौशालाओं के पास चारा उगाने की भूमि नहीं है, उनकी सूची बनाकर अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया।
गौशालाओं में बिजली और कैटल कैचर की व्यवस्था अनिवार्य
जिलाधिकारी ने गौ संरक्षण समिति की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी गौशालाओं में शत-प्रतिशत विद्युत कनेक्शन होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना बिजली के कोई भी गौशाला संचालित नहीं होनी चाहिए। साथ ही, सड़क पर घूम रहे निराश्रित गोवंशों को तत्काल पकड़कर गौशालाओं में संरक्षित करने के लिए कैटल कैचर यंत्र का प्रभावी उपयोग करने के निर्देश भी दिए गए।
सख्ती के संकेत, लापरवाही बर्दाश्त नहीं
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि गौशालाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप होने चाहिए और गौ आश्रय स्थलों की सुविधाएं नियमित रूप से अद्यतन की जाएं।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी पूर्ण बोरा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन विनय कुमार सिंह, परियोजना निदेशक ज्ञानेश्वर तिवारी समेत कई अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे। प्रशासन की इस सख्ती से स्पष्ट है कि जिले में गौ संरक्षण को लेकर अब किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं चलेगी और अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी से अपने कार्यों को अंजाम देना होगा।











