बिजली के निजीकरण के खिलाफ प्रदेशभर में जारी विरोध, मुख्यमंत्री के बयान का स्वागत

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों का निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन लगातार जारी है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिल्ली में दी गई उस जनसभा के बयान का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था को दिल्ली से बेहतर बताया और कहा कि यूपी में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति हो रही है।
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री के इस बयान को सरकारी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था की सफलता का प्रमाण बताया है। समिति ने मांग की है कि प्रदेश में बिजली के निजीकरण का प्रस्ताव तुरंत वापस लिया जाए।
निजीकरण का विरोध जारी
संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा निगमों में निजीकरण का निर्णय अनावश्यक रूप से औद्योगिक अशांति पैदा कर रहा है। अगर निजीकरण का निर्णय रद्द किया जाता है, तो बिजली कर्मचारी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश की बिजली व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।
बिजली कर्मचारियों ने आज प्रदेशभर में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी लखनऊ में मध्यांचल मुख्यालय और शक्ति भवन मुख्यालय पर कर्मचारियों ने भोजन अवकाश और शाम को विरोध सभा का आयोजन किया।
महाकुंभ की व्यवस्था की मिसाल
संघर्ष समिति ने उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों द्वारा महाकुंभ में उत्कृष्ट बिजली व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी पूरी दक्षता से काम करने में सक्षम हैं। समिति ने कहा कि मुम्बई, कोलकाता और दिल्ली जैसे शहरों में जहां बिजली निजी क्षेत्र में है, वहां घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें उत्तर प्रदेश से कई गुना अधिक हैं।
25 जनवरी को होगी घोषणा
संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि 25 जनवरी को भी कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे। इसके साथ ही संघर्ष समिति अगले कदमों की घोषणा भी करेगी।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान, जिसमें उन्होंने दिल्ली की तुलना में उत्तर प्रदेश की बिजली दरों को कम बताया, यह साबित करता है कि निजीकरण से बिजली महंगी होगी। समिति ने प्रबंधन से निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की है।












