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बिजनौर में 28 उद्योगों पर क्यों लगा ब्रेक? 109 में उत्पादन शुरू, डीएम ने दिखाई सख्ती

TARGET TV LIVE | बिजनौर की विशेष रिपोर्ट

 बिजनौर में 28 उद्योगों की रफ्तार पर ब्रेक! 109 इकाइयों में उत्पादन शुरू, बाकी को चालू कराने के लिए डीएम सख्त

137 निवेश प्रस्तावों की समीक्षा में सामने आई तस्वीर; बंद सीवेज पाइपलाइन के लिए अमृत योजना से बनेगा प्रस्ताव, काष्ठ कला उद्योग को बिजली दरों में छूट का मामला भी उठा

बिजनौर, 30 अक्टूबर। जिले में औद्योगिक निवेश को लेकर सरकारी दावों और जमीनी प्रगति के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती लंबित औद्योगिक इकाइयों को उत्पादन की स्थिति में लाने की है। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के तहत हस्ताक्षरित 137 एमओयू में से 109 इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है, लेकिन 28 इकाइयां अभी इस मुकाम तक नहीं पहुंची हैं। यानी निवेश के प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक गतिविधियों में बदलने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

शुक्रवार को कलेक्ट्रेट स्थित महात्मा विदुर सभागार में जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई जिला उद्योग बंधु समिति की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित औद्योगिक इकाइयों की बाधाएं दूर कर उनमें जल्द उत्पादन शुरू कराया जाए। साथ ही उद्यमियों और व्यापारियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने को कहा।

एमओयू हुए, अब उत्पादन की बारी

औद्योगिक निवेश की समीक्षा में सामने आए आंकड़े जिले की प्रगति और चुनौतियों, दोनों को उजागर करते हैं। कुल 137 एमओयू में से 109 इकाइयों में उत्पादन शुरू होना सकारात्मक उपलब्धि है, लेकिन शेष 28 इकाइयों का अब तक शुरू न होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन इकाइयों से संबंधित लंबित प्रक्रियाओं और समस्याओं का प्राथमिकता से निस्तारण किया जाए। विभागीय समन्वय के अभाव में निवेश प्रस्तावों को लटकने न दिया जाए।

दरअसल, किसी जिले के औद्योगिक विकास का वास्तविक पैमाना केवल निवेश समझौते नहीं, बल्कि स्थापित इकाइयों में उत्पादन, स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है। ऐसे में शेष इकाइयों को चालू कराना महत्वपूर्ण है।

शहर की बंद सीवेज पाइपलाइन भी बनी मुद्दा

बैठक में बिजनौर शहर की बंद पड़ी सीवेज पाइपलाइन का मामला भी उठा। जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद बिजनौर के अधिशासी अधिकारी को निर्देश दिए कि पाइपलाइन के सुदृढ़ीकरण के लिए अमृत योजना के अंतर्गत प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाए।

शहर की आधारभूत सुविधाओं की बदहाली का असर आम नागरिकों के साथ व्यापारिक और औद्योगिक वातावरण पर भी पड़ता है। ऐसे में सीवेज व्यवस्था को दुरुस्त करने की पहल जरूरी है। हालांकि, अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि प्रस्ताव कब तैयार होता है और शासन से स्वीकृति मिलने के बाद काम कब शुरू होता है।

काष्ठ कला उद्योग को बिजली में राहत का इंतजार

बिजनौर के काष्ठ कला उद्योग को विद्युत दरों में छूट देने का विषय भी बैठक में उठा। उपायुक्त उद्योग ने बताया कि इस संबंध में शासन को पत्र भेजा जा चुका है।

इसके अलावा कम्युनिटी फैसिलिटी सेंटर की स्थापना एवं संचालन, विभिन्न विभागों से मिलने वाले अनापत्ति प्रमाण पत्र और उद्यमियों से जुड़े अन्य लंबित मामलों की समीक्षा की गई।

डीएम ने निर्देश दिए कि विभागों की ओर से लगाई गई आपत्तियों का प्राथमिकता से निस्तारण हो, ताकि उद्यमियों को अनावश्यक देरी और कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

बैठक से गायब अधिकारी का वेतन रोकने के निर्देश

औद्योगिक समस्याओं के समाधान को लेकर आयोजित बैठक में अधिकारियों की जवाबदेही का मामला भी सामने आया। सिंचाई विभाग के संबंधित अधिकारी के अनुपस्थित रहने पर जिलाधिकारी ने उनका वेतन रोकने के निर्देश दिए।

डीएम ने स्पष्ट किया कि उद्यमियों और व्यापारियों की समस्याओं का समाधान शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए जिला, मंडल और राज्य स्तर पर त्रिस्तरीय उद्योग बंधु व्यवस्था बनाई गई है। अधिकारियों को इस व्यवस्था के उद्देश्य के अनुरूप गंभीरता से काम करना होगा।

विश्लेषण: बिजनौर को निवेश के आंकड़े नहीं, जमीन पर नतीजे चाहिए

बिजनौर में 109 औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन शुरू होना निश्चित रूप से सकारात्मक संकेत है, लेकिन 28 इकाइयों का लंबित रहना कई सवाल भी खड़े करता है। इन इकाइयों के सामने वास्तविक अड़चनें क्या हैं? क्या मामला विभागीय स्वीकृतियों का है, आधारभूत सुविधाओं का या अन्य प्रक्रियागत बाधाओं का? बैठक में इन कारणों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया।

औद्योगिक विकास की रफ्तार तभी बढ़ेगी, जब निवेशकों को समय पर सुविधाएं मिलेंगी और सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। बिजली, सड़क, सीवेज, अनापत्ति प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी स्वीकृतियों में देरी निवेश की गति को प्रभावित कर सकती है।

अब प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर लंबित 28 इकाइयों को उत्पादन से जोड़ना और दूसरी ओर पहले से संचालित उद्योगों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना। बैठक में दिए गए निर्देशों की असली परीक्षा उनके धरातल पर लागू होने से होगी।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

TARGET TV LIVE: अवनीश त्यागी 

सच, सरोकार और जवाबदेही की पत्रकारिता

 

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