इंसाफ के नाम पर मजाक:
DDO दफ्तर बना ‘समझौता केंद्र’, पीड़िता को अपमानित कर आरोपी बाबू को बचाने की रची गई थी पूरी साजिश!
TargetTvLive स्पेशल | रिपोर्ट: अवनीश त्यागी
बिजनौर (उत्तर प्रदेश): विकास भवन के वरिष्ठ सहायक राजकुमार पर शादी का झांसा देकर 7 साल तक शारीरिक शोषण, जबरन गर्भपात और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगे हुए तीन हफ्तों से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। लेकिन इस मामले में जो सच अब बाहर आ रहा है, वह किसी का भी खून खौला देने के लिए काफी है। न्याय की भीख मांग रही पीड़िता को इंसाफ दिलाने के बजाय, जिला विकास अधिकारी (DDO) रचना गुप्ता के कार्यालय में उसे और उसके परिवार को तोड़ने का पूरा खेल खेला गया।
आइए जानते हैं कि कैसे पर्दे के पीछे बैठकर एक रसूखदार सरकारी कर्मचारी को बचाने के लिए पूरी पटकथा (Script) तैयार की गई थी।
DDO ऑफिस में चला ‘समझौते’ का गंदा खेल, सरेआम किया गया अपमान
जब इस गंभीर मामले में DDO रचना गुप्ता ने जांच के नाम पर पीड़िता और उसके परिवार को अपने कार्यालय बुलाया, तो वहाँ प्रशासनिक मर्यादाओं की सरेआम धज्जियां उड़ाई गईं:
- खुलेआम बेइज्जती: दफ्तर के भीतर न सिर्फ पीड़िता को बल्कि उसके साथ आए परिवार के लोगों को भी अपमानित किया गया, ताकि उनका मनोबल टूट जाए।
- अंधेरे कमरे में सौदेबाजी: सारी मर्यादाओं को ताक पर रखकर पीड़िता के एक समर्थक को DDO ने अकेले कमरे में रोका और उस पर दबाव बनाया गया कि वे लोग चुपचाप ‘आपसी समझौता’ कर लें।
- जांच का ढोंग और असली मकसद: इस पूरी कवायद से साफ हो गया कि DDO का मकसद दूध का दूध और पानी का पानी करना नहीं था, बल्कि किसी भी तरह मामले को दबाकर अपने ‘चहेते’ बाबू को बचाना था।
जब समझौता नहीं हुआ, तब पुलिस पर डालने लगे ठीकरा
कहा जा रहा है कि DDO के दफ्तर में चला यह ‘पंचायती नाटक’ तब फेल हो गया जब पीड़िता और उसके समर्थकों ने किसी भी दबाव में झुकने से साफ इंकार कर दिया। जब इनका यह पैंतरा कामयाब नहीं हुआ और मामला तूल पकड़ने लगा, तो अब अधिकारी अपनी खाल बचाने के लिए यह नया राग अलाप रहे हैं कि— “अब पुलिस एक्शन के बाद ही आरोपी राजकुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी।”
यह बहुत बड़ा सवाल है कि जब विभागीय अधिकारी खुद अपने कमरे में बैठकर समझौते का दबाव बना रहे थे, तब वे क्या कर रहे थे? क्या यह आरोपी को बचाने की सोची-समझी साजिश नहीं थी?
पहले से ही दागदार रहा है इस ‘खास’ बाबू का इतिहास
बात सिर्फ इसी मामले की नहीं है, इस वरिष्ठ सहायक राजकुमार का पूरा कच्चा-चिट्ठा ही विवादों से भरा पड़ा है:
- फर्जी प्रमोशन का खेल: सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी DDO कार्यालय से इसे पूरा संरक्षण मिलता रहा है। इस पर गलत तरीके से प्रमोशन पाने के आरोप लगे थे, जो जांच में भी सही साबित हो चुके हैं।
- खास पोस्टिंग की मलाई: नियमों को ताक पर रखकर इसे पीडी ऑफिस (PD Office) में अकाउंटेंट और फिर वरिष्ठ सहायक के रूप में मलाईदार पोस्टिंग दी गई।
- महिला सहकर्मियों पर झूठे इल्जाम: यह बाबू पहले भी अपनी महिला सहकर्मियों के खिलाफ झूठी और बेबुनियाद शिकायतें करता रहा है। जब उच्च स्तरीय जांच समिति ने इसकी जांच की, तो महिला सहकर्मी पूरी तरह बेकसूर साबित हुईं। इसके बावजूद, DDO रचना गुप्ता का खास होने के कारण इस पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सोचने वाली बात (सुलगते सवाल):
- जब मामला शारीरिक शोषण और जबरन गर्भपात जैसे गंभीर जुर्म का था, तो DDO कार्यालय में ‘समझौता’ कराने का दबाव क्यों बनाया गया?
- बार-बार गलतियों और फर्जीवाड़े में घिरे होने के बावजूद इस वरिष्ठ सहायक को कौन सी ताकतें लगातार बचा रही हैं?
- क्या एक पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए अब दफ्तरों में सिर्फ धमकियां और अपमान ही मिलेगा?
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